लखनऊ. राजनीति में आज जब आरोप-प्रत्यारोप और तीखी बयानबाजी अक्सर संवाद पर भारी पड़ती दिखाई देती है, ऐसे दौर में पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर लखनऊ में उनकी राजनीतिक विरासत और विचारों की चर्चा ने नया संदेश दिया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अटल जी को याद करते हुए कहा कि उनके लिए राजनीति सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा, मूल्यों, आदर्शों और राष्ट्रहित का साधन थी.
मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल जी की सबसे बड़ी विशेषता ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना थी. छह दशक से अधिक लंबे सार्वजनिक जीवन में उन्होंने अनेक राजनीतिक उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन राष्ट्रहित से कभी समझौता नहीं किया. अटल जी ने कई ऐसे अवसरों पर देशहित को दलगत हित से ऊपर रखा, जब राजनीतिक परिस्थितियां इसके बिल्कुल विपरीत थीं. उन्होंने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय अटल जी ने राष्ट्रीय एकता और देश के पक्ष को मजबूती से सामने रखा.
मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल जी का व्यक्तित्व इस बात का उदाहरण था कि विपक्ष में रहते हुए भी देश के हितों की रक्षा कैसे की जाती है. आपातकाल के दौर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की पुनर्स्थापना में अटल जी और उनके राजनीतिक साथियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही. अटल जी के उस दौर को याद किया जब वह नेता प्रतिपक्ष थे. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करते समय अटल जी ने यह नहीं देखा कि वह सत्ता पक्ष से हैं या विपक्ष से. उनके लिए सवाल यह था कि भारत का पक्ष क्या है और देशहित में क्या कहा जाना चाहिए. योगी ने कहा कि अटल जी ने यह साबित किया कि मजबूत विपक्ष का मतलब केवल सरकार का विरोध करना नहीं, बल्कि देश के हितों को सर्वोच्च रखना भी है.
कारगिल में दिखी अटल की दृढ़ इच्छाशक्ति
कारगिल युद्ध का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल जी ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से पूरी दुनिया को भारत की ताकत का अहसास कराया. उस समय अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद भारत ने अपने राष्ट्रीय हित और संप्रभुता से समझौता नहीं किया. उन्होंने कहा कि अटल जी का नेतृत्व बताता है कि कठिन परिस्थितियों में सरकार और देश का नेतृत्व किस प्रकार दृढ़ता के साथ निर्णय ले सकता है.
370 से लेकर सुशासन तक अटल की विरासत
मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल जी ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ की थी. जम्मू-कश्मीर में परमिट व्यवस्था और अनुच्छेद 370 के खिलाफ चले आंदोलन से लेकर बाद के राजनीतिक जीवन तक उनके विचार राष्ट्र की एकता और अखंडता से जुड़े रहे. योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अटल जी के जन्मदिवस 25 दिसंबर को सुशासन दिवस के रूप में स्थापित कर उनकी प्रशासनिक सोच और आदर्शों को आगे बढ़ाया है. लखनऊ अटल बिहारी वाजपेयी की राजनीतिक कर्मभूमि रहा है. यहां अटल जी की स्मृतियों को संरक्षित करने के लिए स्मारक और अन्य कार्य किए गए हैं. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार अटल जी के मूल्यों और आदर्शों को आगे बढ़ाते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दे रही है. उन्होंने अटल जी के नाम पर चिकित्सा शिक्षा से जुड़े संस्थानों और अन्य स्मृति स्थलों का भी उल्लेख किया.
ब्रजेश पाठक बोले-‘मतभेद हों, मनभेद नहीं’
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि अटल जी आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं. उन्होंने कहा कि अटल जी की राजनीति की सबसे बड़ी खूबी थी कि उन्होंने लोकतांत्रिक मर्यादा और संवाद को हमेशा महत्व दिया. पाठक ने कहा कि विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन राजनीतिक संघर्ष व्यक्तिगत दुश्मनी में नहीं बदलना चाहिए. सत्ता और विपक्ष लोकतंत्र के दो पहिए हैं. मतभेद लोकतंत्र को मजबूत करते हैं, लेकिन मनभेद लोकतांत्रिक संवाद को कमजोर करते हैं. उन्होंने कहा कि आज की राजनीति में जब बहस कई बार आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित हो जाती है, तब अटल जी की संवाद और मर्यादा वाली राजनीति और अधिक प्रासंगिक हो जाती है.


