लखनऊ. यूपी में बच्चों के अंदर बच्चों में नाटेपन की दर उल्लेखनीय गिरावट आई है. सरकार ने दावा किया है कि वर्ष 2015-16 में यह दर 46.3 प्रतिशत थी, जो 2019-21 में घटकर 39.7 प्रतिशत हो गई. वहीं अब में यह आंकड़ा 31.5 प्रतिशत तक पहुंच गया है. इसके अलावा अल्पवजन और दुबलापन जैसी समस्याओं में भी सुधार दर्ज किया गया है.

उत्तर प्रदेश में कुपोषण के खिलाफ चलाये जा रहे अभियान के तहत टेक होम राशन (टीएचआर) योजना के जरिए बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं की अलग-अलग पोषण जरूरतों के अनुसार उत्पाद तैयार कर उपलब्ध कराए जा रहे हैं. योजना के तहत शिशु अमृत, शिशु आहार, बाल पुष्टिकर, संपूर्ण मातृ आहार, आरोग्य पोषण, बाल संजीवनी और सक्षम पोषण जैसे सात उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं. इनमें ऊर्जा, प्रोटीन, आयरन समेत जरूरी पोषक तत्व शामिल किए गए हैं.

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आंगनबाड़ी केंद्रों से होती है मॉनिटरिंग

टीएचआर योजना की व्यवस्था को आंगनबाड़ी सेवाओं से जोड़ा गया है. आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां लाभार्थियों को पोषण सामग्री उपलब्ध कराने के साथ बच्चों का वजन मापने, उनके विकास की निगरानी करने और गर्भवती व धात्री महिलाओं को पोषण संबंधी परामर्श देने का काम करती हैं.

4 हजार से अधिक महिलाओं को मिला रोजगार

टेक होम राशन योजना को महिला सशक्तीकरण से जोड़ना इसकी अहम विशेषता है. उत्पादन और आपूर्ति की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूहों को दी गई है. वर्तमान में 4,000 से अधिक महिलाएं इन उत्पादन इकाइयों से जुड़कर रोजगार प्राप्त कर रही हैं.

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गुणवत्ता व साफ-सफाई को लेकर सख्त निर्देश

बाल विकास एवं पुष्टाहार तथा राज्य पोषण मिशन की निदेशक हर्षिता माथुर ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को दिए जाने वाले पोषाहार की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर शासन ने सम्बंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं. भोजन की गुणवत्ता उच्च स्तर की होना अनिवार्य है. बच्चों को परोसने से पहले हर दिन कम से कम दो वयस्कों द्वारा भोजन की गुणवत्ता की जांच कराने को कहा गया है.