लखनऊ. उत्तर प्रदेश में अब छोटे बच्चों की पढ़ाई सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहेगी. बालवाटिकाओं में बच्चों को खेल, कहानी, बातचीत और गतिविधियों के जरिए पढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है. इसके लिए प्रदेश के सभी 75 जिलों से 375 ईसीसीई (अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन) मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए गए हैं.

बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य बच्चों की शिक्षा की मजबूत नींव बचपन से तैयार करना है. प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स अब अपने-अपने जिलों और ब्लॉक स्तर पर शिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे. इसका सीधा असर प्रदेश की बालवाटिकाओं में दिखाई देने की उम्मीद है.

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सात बैच में हुआ प्रशिक्षण

महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने बताया कि बेसिक शिक्षा विभाग की प्री-प्राइमरी यूनिट ने 6 से 31 जुलाई के बीच लखनऊ स्थित दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्रामीण विकास संस्थान में सात आवासीय प्रशिक्षण बैच आयोजित किए गए. जिसमें 75 जिलों के 375 सदस्यों ने हिस्सा लिया.

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प्रशिक्षण के दौरान मास्टर ट्रेनर्स को छोटे बच्चों की उम्र और जरूरत के हिसाब से पढ़ाने के तरीके बताए गए. इसमें खेल आधारित शिक्षा, बाल केंद्रित गतिविधियां, कहानी के जरिए सीखना और कक्षा को बच्चों के अनुकूल बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया. प्रतिभागियों ने बालवाटिका कक्षाओं का भ्रमण कर गतिविधि आधारित पढ़ाई को करीब से भी समझा.

शिक्षक भी होंगे प्रशिक्षित

अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि 375 मास्टर ट्रेनर्स जिला और ब्लॉक स्तर पर शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने का काम करेंगे. इसके जरिए बच्चों को रटने के बजाय गतिविधियों के माध्यम से सीखने का मौका मिलेगा. उम्मीद है कि इससे बच्चों की भाषा, गणित की शुरुआती समझ, सामाजिक व्यवहार और मानसिक विकास को मजबूती मिलेगी.