सुधीर सिंह राजपूत, मिर्जापुर. जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी तंत्र, बैंकिंग व्यवस्था और पहचान संबंधी सुरक्षा पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. रोज़ की दिहाड़ी कर किसी तरह परिवार का पेट पालने वाले एक मजदूर के घर जब आयकर विभाग और जीएसटी से जुड़ी करोड़ों रुपये की नोटिस पहुंचा तो पूरे परिवार में हड़कंप मच गया. 41 करोड़ रुपये के लेन-देन और करोड़ों रुपये कर जमा करने का नोटिस मिलना किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लग रहा.
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बता दें कि पड़री थाना क्षेत्र के लोकापुर गांव निवासी श्याम बाबू बिंद के अनुसार, वर्ष 2021 में वह अपने साले के साथ रोजगार की तलाश में दिल्ली गए थे. वहां साले ने बताया कि कंपनी में नौकरी पाने के लिए बैंक खाता खुलवाना जरूरी है. भरोसा कर उन्होंने खाता खुलवा दिया, लेकिन कुछ दिनों बाद नौकरी नहीं मिली और वह वापस गांव लौट आए. जब उन्होंने बैंक पासबुक मांगी तो उन्हें नहीं दी गई. उस समय उन्हें इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि उनके नाम पर भविष्य में करोड़ों रुपये का खेल खेला जाएगा.
वहीं करीब तीन साल बाद अचानक उनके घर आयकर विभाग की नोटिस पहुंच गया. पहले नोटिस में उनके खाते से लगभग 21 करोड़ रुपये के लेन-देन का उल्लेख था. परिवार अभी इस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि कुछ समय बाद दूसरा नोटिस आ गया, जिसमें 41 करोड़ रुपये के लेन-देन का जिक्र करते हुए लगभग 7 से 8 करोड़ रुपये कर जमा करने का निर्देश दिया गया. यह नोटिस देखते ही श्याम बाबू के होश उड़ गए.
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श्याम बाबू का कहना है कि वह मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं. उनके पास न कोई बड़ा कारोबार है, न करोड़ों की संपत्ति और न ही इतनी आय कि करोड़ों रुपये के लेन-देन की कल्पना भी कर सकें. उनका कहना है कि यदि पूरे गांव की संपत्ति भी बेच दी जाए, तब भी इतनी बड़ी रकम जमा नहीं हो सकती. नोटिस मिलने के बाद पूरा परिवार भय और मानसिक तनाव में जी रहा है.
पीड़ित के अधिवक्ता संजय बिंद ने बताया कि उनके मुवक्किल बेहद गरीब हैं और दिहाड़ी मजदूरी कर जीवनयापन करते हैं. उन्होंने आशंका जताई कि किसी ने उनके दस्तावेजों और बैंक खाते का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपये का लेनदेन किया है. यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो एक निर्दोष व्यक्ति को भारी कानूनी और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.

