गोविन्द पटेल, कुशीनगर. नेपाल से निकलने वाली बड़ी गंडक नदी से हर वर्ष होने वाले कटान और बाढ़ से सीमावर्ती गांवों की सुरक्षा के लिए बाढ़ खंड विभाग करोड़ों रुपये की फ्लड प्रोटेक्शन एवं एंटी इरोजन योजनाएं संचालित करता है. इन योजनाओं के तहत स्टोन रिवेटमेंट, लॉन्चिंग एप्रन, स्पर (ठोकर), गाइड बंधा, बर्म स्ट्रेंथनिंग, वायर क्रेटिंग तथा बोल्डर पैकिंग जैसे तकनीकी कार्य कराए जाते हैं. हालांकि, तमकुहीराज क्षेत्र के अहिरौलीदान एपी तटबंध और छितौनी तटबंध के बीराभार-भैंसहा स्पर पर निर्माण कार्यों की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
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स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई स्थानों पर लॉन्चिंग एप्रन अधूरा है, स्टोन पिचिंग पूरी नहीं हुई है तथा फिल्टर मीडिया और बोल्डर पैकिंग भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं की गई. उनका कहना है कि नदी में जलस्तर बढ़ने के बाद निर्माण कार्य शुरू किए जाने से तेज बहाव में बोल्डर और वायर क्रेट बह जाते हैं, जिससे हर वर्ष करोड़ों रुपये की परियोजनाएं प्रभावित होती हैं. तकनीकी जानकारों के अनुसार लॉन्चिंग एप्रन का निर्माण बाढ़ से पहले पूरा होना चाहिए, ताकि नदी के कटान के दौरान एप्रन स्वतः लॉन्च होकर तटबंध की नींव को सुरक्षा प्रदान कर सके. यदि कार्य समय पर पूरा नहीं होता है तो कटान का खतरा बढ़ जाता है और तटबंध कमजोर हो सकता है. ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग हर वर्ष एंटी इरोजन कार्यों पर भारी बजट खर्च करता है, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित नहीं हो पाती. इससे सरकारी धन का प्रभावी उपयोग नहीं हो रहा है और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा भी सवालों के घेरे में है.
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समाजवादी पार्टी के नेता पवन दूबे ने भी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की. वहीं उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक अजय कुमार लल्लू ने आरोप लगाया कि बाढ़ खंड विभाग की कार्यप्रणाली समझ से परे है और करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है. इस संबंध में जब बाढ़ खंड विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो वे कैमरे के सामने आने से बचते रहे और कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि फ्लड फाइटिंग और एंटी इरोजन के कार्य समय पर तथा निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार पूरे किए जाएं तो क्या हर वर्ष करोड़ों रुपये की मरम्मत और पुनर्निर्माण की आवश्यकता पड़ेगी? साथ ही यह भी देखना होगा कि विभाग निर्माण एजेंसियों और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करता है या नहीं.

