लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने युवाओं को रोजगारपरक और आधुनिक तकनीकों से लैस बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य कौशल विकास निधि (एसएसडीएफ) योजना के दूसरे चरण के तहत प्रदेश के 1 लाख से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए 936 प्रशिक्षण प्रदाताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है और 1 अगस्त से प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि युवाओं को रोजगार के साथ-साथ भविष्य की तकनीकों के अनुरूप तैयार करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी के तहत सभी प्रशिक्षण कार्यक्रमों में ‘एआई फॉर ऑल’ और सॉफ्ट स्किल मॉड्यूल को अनिवार्य किया गया है।

मुख्यालय से होगी मॉनिटरिंग

उन्होंने बताया कि सरकार ने प्रशिक्षण केंद्रों की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कई नए प्रावधान भी लागू किए हैं। सभी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य होगा, जिनकी निगरानी सीधे मुख्यालय स्तर से की जाएगी। इसके अलावा प्रत्येक केंद्र पर हिंदी और अंग्रेजी अखबार उपलब्ध कराना भी जरूरी होगा, ताकि प्रशिक्षुओं का सामान्य ज्ञान बढ़ सके।

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होगा एआई डैशबोर्ड का इस्तेमाल

अधिकारियों के अनुसार इस बार लक्ष्य आवंटन की प्रक्रिया में ‘कौशल दर्पण’ एआई डैशबोर्ड का इस्तेमाल किया गया है। जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयों से प्राप्त सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर ही प्रशिक्षण प्रदाताओं को लक्ष्य सौंपे गए हैं। सरकार का दावा है कि इससे पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनी है।

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एक लाख युवाओं को ट्रेनिंग का लक्ष्य

मिशन निदेशक पुलकित खरे ने बताया कि 936 प्रशिक्षण प्रदाताओं को 1 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य दिया गया है। इनमें 831 निजी, सरकारी और स्टार्टअप संस्थानों को 91,425 युवाओं तथा 105 औद्योगिक और न्यू-एज प्रशिक्षण प्रदाताओं को 14,650 युवाओं के प्रशिक्षण की जिम्मेदारी दी गई है।

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यह होंगे प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल

प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आईटी-आईटीईएस, फूड प्रोसेसिंग, अपैरल और हैंडीक्राफ्ट जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों में भविष्य में रोजगार की संभावनाएं अधिक हैं।