सतिश सिंह, लखनऊ. झांसी स्थित 140 साल पुराना पारीछा बांध (Parichha Dam) अब उत्तरप्रदेश के लिए वैश्विक विरासत का हिस्सा बन गया है. बांध को इंटरनेशनल कमीशन ऑन इरिगेशन एंड ड्रेनेज (ICID) ने वर्ल्ड हेरिटेज इरिगेशन स्ट्रक्चर्स (WHIS) के रूप में मान्यता दे दी है. मान्यता मिलने के बाद पारीक्षा बांध को फ्रांस के मार्सेई में 14 अक्टूबर को प्रस्तावित 26वीं आईसीआईडी इंटरनेशनल कांग्रेस और 77वीं इंटरनेशनल एग्जीक्यूटिव काउसिंल मीटिंग के दौरान डब्ल्यूएचआईएस अवार्ड-26 दिया जाएगा. प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन अनिल गर्ग ने बताया कि इसके लिए विभाग के अधिकारियों को आमंत्रित किया गया है.

झांसी का पारीछा बांध बेतवा नदी पर बना है. यह करीब 140 साल से बुंदेलखंड की सिंचाई व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. यह बेतवा नहर प्रणाली का मुख्य हिस्सा है. इस नहर व्यवस्था से बुंदेलखंड के सूखे क्षेत्रों में खेती के लिए पानी पहुंचाया जाता है. पारीछा बांध करीब 1,174 मीटर लंबा है और इसकी ऊंचाई नदी तल से करीब 16.8 मीटर है. इसमें 318 स्टील के गेट लगाए गए हैं. इन गेटों की मदद से पानी को रोकने और जरूरत के हिसाब से छोड़ने का काम किया जाता है.

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2,400 मिलियन क्यूबिक फीट बढ़ाई गई क्षमता

अधिकारियों का कहना है कि पहले इसकी क्षमता करीब 1,700 मिलियन क्यूबिक फीट थी, जिसे बढ़ाकर करीब 2,400 मिलियन क्यूबिक फीट किया गया. यह बांध 140 साल पुराना होने के बाद भी काम कर रहा है. इस बांध से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में सिंचाई का फायदा मिलता है. इस परियोजना की बिजली उत्पादन क्षमता 920 मेगावाट है. बांध के इतिहास को लेकर विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पारीछा बांध को विकसित करने की योजना 19वीं सदी में बनाई गई थी. वर्ष 1855 में कैप्टन स्ट्रेची ने बुंदेलखंड के लिए नहर प्रणाली विकसित करने का विचार रखा था. इसके बाद सर्वे किया गया. वर्ष 1881 में इसका निर्माण शुरू हुआ और वर्ष 1886 में बांध चालू हो गया.