मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के क्रम में सूचना प्रौद्योगिकी, सुराज एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा उत्तराखण्ड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 (Uttarakhand Science, Technology and Innovation Policy-2026) जारी कर दी गई है. इस नीति का उद्देश्य राज्य में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित विकास और नवाचार को बढ़ावा देते हुए उत्तराखण्ड को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और सूचना प्रौद्योगिकी के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है.
नई नीति में अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित करते हुए स्थानीय आवश्यकताओं एवं चुनौतियों के समाधान के लिए विज्ञान और तकनीक के प्रभावी उपयोग पर जोर दिया गया है. नीति का लक्ष्य आर्थिक विकास, सामाजिक समावेशन और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए सतत विकास की दिशा में राज्य को आगे बढ़ाना है. इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तर पर एक सलाहकार निकाय का गठन किया जाएगा.
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नीति के तहत राज्य, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न हितधारकों के बीच सहयोग को मजबूत बनाने के लिए व्यापक सहयोगात्मक तंत्र विकसित किया जाएगा. राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, निजी क्षेत्र की कंपनियों और स्टार्ट-अप्स में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार (STI) इकाइयों की स्थापना सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तरीय समन्वय समिति का गठन भी किया जाएगा.
नीति के अंतर्गत सार्वजनिक निधि से संचालित शोध कार्यों से प्राप्त डेटा का डिजिटल भंडारण किया जाएगा तथा इसे सभी हितधारकों तक सुरक्षित और सरल रूप से उपलब्ध कराया जाएगा. भारत सरकार की “एक राष्ट्र, एक सदस्यता” पहल के माध्यम से शोध और विज्ञान संबंधी अभिलेखागारों तक पहुंच भी उपलब्ध होगी. “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” की अवधारणा को साकार करने के लिए तकनीक के स्वदेशीकरण और स्थानीयकरण को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा.
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नई नीति के तहत राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप स्थानीय तकनीकी समाधान विकसित किए जाएंगे तथा पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को भी आधुनिक अनुसंधान एवं नवाचार से जोड़ा जाएगा. साथ ही शैक्षणिक संस्थानों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा. विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे. नवीन शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षकों के कौशल विकास हेतु अत्याधुनिक शिक्षण-अधिगम केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे. विज्ञान संचार और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए राज्य में विज्ञान नगरी, विज्ञान केंद्र, तारामंडल, अटल टिंकरिंग लैब, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) प्रयोगशालाएं, खगोल अवलोकन संघ तथा उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा.
नई नीति में AI, ब्लॉकचेन, रोबोटिक्स, ड्रोन, संवर्धित वास्तविकता (AR), आभासी वास्तविकता (VR) और मिश्रित वास्तविकता (MR) जैसी उभरती तकनीकों को विशेष महत्व दिया गया है. इसके अतिरिक्त राज्य में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार वेधशाला की स्थापना की जाएगी. अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफॉर्म विकसित किए जाएंगे.
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 हमारे राज्य को ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है. हमारा उद्देश्य केवल विज्ञान और तकनीक का विस्तार करना नहीं, बल्कि उसे आम जनजीवन, सुशासन, आपदा प्रबंधन, शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य और रोजगार सृजन से जोड़ना है. यह नीति युवाओं, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स, वैज्ञानिकों और जमीनी स्तर के नवप्रवर्तकों को एक साझा मंच प्रदान करेगी.

