​Automobile Desk – देश में सड़क हादसों की बढ़ती संख्या पर प्रभावी अंकुश लगाने और ड्राइविंग को अधिक सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार एक दूरगामी तकनीक लागू करने जा रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने ‘व्हीकल-टू-व्हीकल’ (V2V) कम्युनिकेशन सिस्टम को भारतीय सड़कों पर उतारने का खाका तैयार कर लिया है। इस वायरलेस तकनीक के माध्यम से भविष्य में वाहन आपस में रियल-टाइम डेटा साझा करेंगे, जिससे सड़क पर संभावित खतरों की जानकारी ड्राइवर को पहले ही मिल जाएगी।

क्या है व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) तकनीक?

​व्हीकल-टू-व्हीकल यानी V2V एक अत्याधुनिक वायरलेस नेटवर्किंग सिस्टम है। इसके तहत सड़क पर चल रहे वाहन सीधे एक-दूसरे को अपनी गति, सटीक लोकेशन, यात्रा की दिशा, ब्रेकिंग स्टेटस और एक्सीलरेशन जैसी अहम जानकारियां भेजेंगे।
​यदि आपके आगे चल रहे किसी वाहन ने अचानक तेज ब्रेक लगाया है, या मोड़ के उस पार कोई गाड़ी गलत दिशा में खड़ी है जो ड्राइवर को सीधे तौर पर दिखाई नहीं दे रही, तो यह सिस्टम तुरंत पीछे आ रही गाड़ियों को अलर्ट जारी कर देगा। इससे चालकों को संभलने का पर्याप्त समय मिलेगा और टकराने या श्रृंखला-बद्ध हादसों की आशंका बेहद कम हो जाएगी।

दो चरणों में लागू होगी योजना

​मंत्रालय ने इस तकनीक को सुचारू रूप से अपनाने के लिए सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स (CMVR), 1989 में संशोधन का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। उद्योग जगत और वाहन निर्माताओं को तैयारी का पूरा समय देने के लिए इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा:

​पहला चरण (1 अक्टूबर 2027): इस तारीख से निर्मित होने वाले L, M और N श्रेणी के उन वाहनों पर नियम लागू होगा जिनमें V2V सिस्टम लगाया जाएगा। इन वाहनों को ‘AIS-230’ सुरक्षा मानक का पालन करना होगा।

​दूसरा चरण (1 अक्टूबर 2028): इस तारीख से इन सभी श्रेणियों (टू-व्हीलर, कार, कमर्शियल वाहन, बस और ट्रक) के नए वाहनों में V2V कम्युनिकेशन सिस्टम अनिवार्य रूप से शामिल करना होगा।

स्पेक्ट्रम और लाइसेंसिंग में राहत

​इस पूरे सिस्टम को निर्बाध रूप से संचालित करने के लिए 5.875 GHz से 5.925 GHz फ्रीक्वेंसी बैंड का चयन किया गया है। वाहन कंपनियों के लिए राहत की बात यह है कि दूरसंचार विभाग (DoT) ने इस फ्रीक्वेंसी बैंड को लाइसेंस-मुक्त श्रेणी में रखा है। इससे ऑटोमोबाइल कंपनियों को बिना किसी जटिल कागजी प्रक्रिया के तकनीक को अपने वाहनों में इंटीग्रेट करने में आसानी होगी।

ADAS से कितनी अलग है यह तकनीक?

​वर्तमान में कई आधुनिक गाड़ियों में एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) देखने को मिलता है, जो मुख्य रूप से कैमरों, रडार और ऑन-बोर्ड सेंसर पर निर्भर करता है। हालांकि, ADAS की अपनी सीमाएं हैं—जैसे धुंध, तेज बारिश या फिर किसी मोड़ के पीछे (ब्लाइंड स्पॉट) की स्थिति में इसके सेंसर कई बार समय पर प्रतिक्रिया नहीं दे पाते।

​V2V तकनीक सीधे दूसरी गाड़ी के डेटा नेटवर्क से जुड़ती है। यह किसी भी विजिबिलिटी बाधा या दूरी की परवाह किए बिना सीधे दूसरी गाड़ी से चेतावनी प्राप्त कर लेती है, जिससे यह ADAS की तुलना में अधिक सटीक और सुरक्षित साबित होती है।