दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने स्ट्रीट वेंडर्स (Street vendors) के सामान की जब्ती को लेकर अहम निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने नगर निगम (MCD) और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) को आदेश दिया है कि स्ट्रीट वेंडर्स का सामान जब्त किए जाने के 24 घंटे के भीतर उन्हें जब्ती का मेमो उपलब्ध कराया जाए। अदालत ने इसके साथ ही जब्ती की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग करने का भी निर्देश दिया है। कोर्ट के इस आदेश को रेहड़ी-पटरी वालों के लिए बड़ी राहत और महत्वपूर्ण जीत के तौर पर देखा जा रहा है।
जनहित याचिका पर हुई सुनवाई
‘रेहड़ी-पटरी एकता मंच’ की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि कार्रवाई के दौरान स्ट्रीट वेंडर्स का सामान जब्त कर लिया जाता है, लेकिन उन्हें जब्ती का मेमो उपलब्ध नहीं कराया जाता। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने जब्ती की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए MCD और NDMC को स्पष्ट निर्देश दिए।
स्ट्रीट वेंडर्स के सामान की जब्ती पर दिल्ली HC सख्त
दिल्ली हाई कोर्ट ने स्ट्रीट वेंडर्स के सामान की जब्ती प्रक्रिया को लेकर अहम निर्देश जारी किए हैं। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और विकास महाजन की बेंच ने आदेश दिया है कि नगर निगम (MCD) और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) रेहड़ी-पटरी वालों का सामान जब्त करते समय पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग करें। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जब्त किए गए सामान का मेमो संबंधित स्ट्रीट वेंडर को 24 घंटे के भीतर उपलब्ध कराया जाए। कोर्ट के इस आदेश को रेहड़ी-पटरी वालों के लिए बड़ी राहत और महत्वपूर्ण जीत के तौर पर देखा जा रहा है।
मेमो में दर्ज करनी होगी पूरी जानकारी
हाई कोर्ट ने जब्ती मेमो में दर्ज की जाने वाली जानकारियों को भी स्पष्ट किया है। मेमो में जब्ती की तारीख, जब्त किए गए सामान की पूरी सूची, सामान को जिस स्थान पर रखा गया है उसकी जानकारी और शेल्फ नंबर दर्ज करना होगा। इसके अलावा जब्त सामान से संबंधित अन्य जरूरी विवरण और जब्ती प्रक्रिया से जुड़े अधिकारी का विवरण भी मेमो में शामिल किया जाना चाहिए। इससे जब्ती की कार्रवाई में पारदर्शिता आएगी और वेंडर्स को अपने सामान की स्थिति की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
कोर्ट ने कहा है कि अगर स्ट्रीट वेंडर पर कोई जुर्माना लगाया जाता है तो उसकी जानकारी भी उसे उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इसके साथ ही जुर्माने से संबंधित अधिकारी का नाम और अन्य आवश्यक विवरण भी वेंडर को दिया जाना चाहिए। अदालत के मुताबिक, जब्ती की प्रक्रिया से जुड़े सभी जरूरी विवरण दर्ज होने से कार्रवाई में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी। हाई कोर्ट ने यह आदेश 10 सितंबर को ‘रेहड़ी-पटरी एकता मंच’ की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में स्ट्रीट वेंडर्स के नियमों के उल्लंघन के आरोप में सामान जब्त किए जाने की प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी।
MCD-NDMC ने बताई अपनी प्रक्रिया
सुनवाई के दौरान MCD और NDMC के वकील ने अदालत के सामने अपनी दलील रखी। उन्होंने कहा कि सामान एक निर्धारित समय पर जब्त किया जाता है और अधिकारी मौके पर ही जब्ती मेमो तैयार करते हैं। लेकिन इस दौरान दूसरे वेंडर्स को कार्रवाई की भनक लग जाती है, जिससे उनके मौके से बचकर निकल जाने की संभावना रहती है। वकीलों ने बताया कि मौजूदा प्रक्रिया के तहत पहले सामान जब्त किया जाता है और शाम को जब्ती मेमो के साथ जुर्माने की रसीद दी जाती है। जब्त किए गए सामान को रखने के लिए वेयरहाउस की व्यवस्था की जाती है और प्रत्येक वेंडर का सामान निर्धारित शेल्फ पर रखा जाता है।
वेंडर्स को दी जाने वाली रसीद में संबंधित शेल्फ का नंबर भी दर्ज होता है। जुर्माना जमा करने के बाद संबंधित वेंडर को उसका जब्त सामान वापस कर दिया जाता है। हाई कोर्ट के निर्देश के बाद अब जब्ती की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग करनी होगी और 24 घंटे के भीतर वेंडर को जब्ती मेमो उपलब्ध कराना होगा। इससे जब्त किए गए सामान का रिकॉर्ड स्पष्ट रखने के साथ-साथ कार्रवाई में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
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