अनमोल मिश्रा, सतना। स्कूल की घंटी बजते ही बच्चे बैग-किताबें लेकर कक्षाओं में पहुंचते हैं। कोई पढ़ाई में जुटता है तो कोई दोस्तों के साथ खेलता है। लेकिन धवारी स्थित तक्षशिला मिडिल स्कूल में एक विद्यार्थी की कहानी सबसे अलग है। यहां लड्डू गोपाल का बाकायदा एडमिशन हुआ है। स्कूल के रिकॉर्ड में उनका नाम श्याम पांडेय दर्ज है। जन्माष्टमी पर यह अनोखी कहानी आस्था के साथ 8 साल की आयुषी के उस मासूम रिश्ते को भी सामने लाती है, जिसमें लड्डू गोपाल उसके लिए भगवान से बढ़कर छोटे भाई और लल्ला हैं।

लल्ला को अकेला नहीं छोड़ती आयुषी


धवारी गली नंबर-1 निवासी नरेंद्र कुमार पांडेय और रेखा पांडेय भगवान श्रीकृष्ण के भक्त हैं। उनकी बेटी आयुषी कक्षा दूसरी में पढ़ती है, जबकि छोटी बहन श्यामा केजी में है। मां रेखा बताती हैं कि आयुषी के लिए लड्डू गोपाल पूजा की प्रतिमा नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य हैं। वह उन्हें अपने साथ खिलाती, सुलाती और उनकी देखभाल करती है। रेखा के मुताबिक, आयुषी कुछ देर के लिए भी लल्ला को अकेला छोड़ना पसंद नहीं करती। परिवार कहीं बाहर जाता है तो लड्डू गोपाल भी साथ जाते हैं। आयुषी उन्हें अपने छोटे भाई की तरह हर जगह साथ रखना चाहती है।

भाई वृंदावन गया तो लल्ला बन गए सहारा


परिवार के मुताबिक, आयुषी के भाई अभिषेक पांडेय पढ़ाई के लिए वृंदावन के संस्कृत विद्यालय चले गए थे। भाई के दूर जाने से आयुषी उदास रहने लगी। तब मां ने उसे समझाया कि लल्ला के साथ रहो, वे तुम्हें अकेला महसूस नहीं होने देंगे। इसके बाद आयुषी का लड्डू गोपाल से लगाव और गहरा हो गया। परिवार वर्ष 2025 में लड्डू गोपाल को वृंदावन से लेकर आया था। उनके कपड़े भी वृंदावन से मंगाए जाते हैं। परिवार सात्विक जीवनशैली अपनाता है।

छह महीने तक एडमिशन को लेकर असमंजस


स्कूल संचालक सूर्य प्रकाश सिंह के मुताबिक, पांडेय परिवार ने जब लड्डू गोपाल के एडमिशन की बात कही तो स्कूल प्रबंधन के लिए यह बिल्कुल नया अनुभव था। परिवार भी कई महीनों तक इस बात को लेकर संकोच में रहा। बाद में वे लड्डू गोपाल को स्कूल लेकर पहुंचे और प्रवेश का आग्रह किया। परिवार की आस्था और भावनात्मक जुड़ाव को देखते हुए स्कूल प्रबंधन ने इसे स्वीकार कर लिया।

जन्माष्टमी पर हुआ विशेष पूजन


जन्माष्टमी के मौके पर स्कूल में श्याम पांडेय यानी लड्डू गोपाल का विशेष पूजन-अर्चन किया गया। स्कूल स्टाफ और अभिभावकों की मौजूदगी में वैदिक रीति-रिवाज से पूजा हुई। आज स्कूल के बाकी बच्चों की तरह लड्डू गोपाल भी परिवार की नजर में स्कूल का हिस्सा हैं और आयुषी के लिए उनके लल्ला भी।

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