धर्म डेस्क : हिंदू धर्म में भगवानों के वाहन का बहुत महत्व है. जो उनकी सवारी भी कहती है. हर देवी देवता का वाहन किसी न किसी प्रतीक और संदेश को दर्शाता है. ऐसे ही माता शीतला, जिन्हें रोगों से हमें बचाने वाली, हमारी रक्षा करने वाली देवी कहा जाता है. उनका वाहन गधा बताया गया है. यह प्रश्न अधिकांश लोगों के मन में आता है. कि आखिर मां शीतला का वाहन गधा ही क्यों है?

पौराणिक कथाओं में इसके पीछे बहुत गहरा अर्थ और संदेश छुपा हुआ है. एक कथा के अनुसार, पाचीन समय में जब किसी एरिया में महामारी फैलती थी, तब लोग मा शीतला की पूजा-अर्चना करते, ऐसा माना जाता है कि मां शीतला गधे पर ही सवार होकर गांव-गांव जाती थीं और सब इंसानों को बीमारियों से छुटकारा दिलाती थीं. गधा मुश्किल रास्तों पर भी आसानी से चल सकता है. और हर मौसम सहन करने की क्षमता उसमें होती है. यही कारण है कि इसे मा शीतला ने अपने वाहन के रूप में स्वीकार किया.

ऐसे ही मां शीतला को झाड़ू, कलश और सूपडा लिए हुए दिखाया जाता है, जिसमें झाड़ू गंदगी और रोगों को दूर करने का प्रतीक है. साथ ही कलश में भरा शीतल जल सेहत स्वास्थ्य और शांति का प्रतीक है. सूप का संबंध सफाई और संतुलन से माना जाता है. इनके साथ गधा एक महत्वपूर्ण प्रतीक के रूप में जुड़ा है, जो सादगी और सेवा का भाव दर्शाता है.

गधे को सहनशीलता और धैर्य का प्रतीक भी कही जाता है. यह जानवर अत्यधिक मेहनत करने के बाद भी बिना किसी शिकायत अपना कार्य पूर्ण करता रहता है. यही गुण मां शीतला के स्वभाव से मेल खाते हैं, क्योंकि वे अपने भक्तों के दु:ख दूर करने के लिए हर परिस्थिति में तत्पर रहती हैं. इसीलिए गधे को उनका वाहन माना गया है.

एक अन्य मान्यता के अनुसार गधा अहंकार से दूर रहने का संदेश भी देता है. यह हमें सिखाता है कि जीवन में चाहे कितनी भी सफलता या सम्मान मिल जाए. व्यक्ति को विनम्र और सरल बने रहना चाहिए. माता शीतला का वाहन गधा होना इस बात का संकेत है कि उनके आशीर्वाद के लिए अहंकार नहीं, बल्कि भक्ति और नम्रता आवश्यक है.

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