अमेरिकी सांसदों ने रूस पर प्रतिबंध लगाने से जुड़े बिल में बदलाव के लिए संशोधन प्रस्ताव पेश किया है, जिसकी प्रतिनिधि सभा से पारित कराने की समयसीमा अब बेहद नजदीक आ गई है. इस बिल में जहां एक प्रस्ताव भारत समेत अमेरिका के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदारों का नाम सीधे तौर पर शामिल करने की मांग करता है, वहीं दूसरा प्रस्ताव इस टैक्स वाले हिस्से को ही पूरी तरह से हटाने की वकालत कर रहा है.
वाशिंगटन का मानना है कि रूस का कच्चा तेल व्यापार यूक्रेन के खिलाफ जंग के लिए फंड जुटाने में मदद कर रहा है. एक संशोधन में भारत समेत रूस के 10 प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने की तैयारी है.
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक में कई संशोधन पेश किए गए हैं. पारित कराने की समयसीमा नजदीक आने के बीच अमेरिकी सांसदों ने इसमें कई संशोधन पेश किए हैं. इनमें भारत समेत रूस के 10 प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के नाम स्पष्ट रूप से शामिल करने और इन देशों पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने का प्रस्ताव है.
अमेरिका का मानना है कि रूस के कच्चे तेल का कारोबार यूक्रेन के खिलाफ चल रहे युद्ध को आर्थिक मदद दे रहा है. यह विधेयक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह अधिकार भी देता है कि वे रूस के सबसे बड़े तेल खरीदारों जिनमें चीन और भारत शामिल हैं पर 100 फीसदी तक का ट्रेड टैरिफ लगा सकें.
इस बीच, अमेरिकी सांसदों ने इस विधेयक में कई अहम संशोधन पेश किए हैं, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है. डेमोक्रेटिक सांसद स्टेनी होयर द्वारा पेश किए गए एक नए संशोधन में चीन, भारत, तुर्किये, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक रिपब्लिक, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सिंगापुर, कजाखस्तान और किर्गिज रिपब्लिक के नाम स्पष्ट रूप से शामिल किए गए हैं.
3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले अमेरिकी सदन के जल्दी अवकाश पर जाने से पहले इसके पास काम करने के लिए महज 4 दिन बचे हैं. वहीं, सीनेट द्वारा 7 अगस्त को पास किए गए इस मूल बिल में सीधे तौर पर किसी देश का नाम नहीं लिखा है, बल्कि केवल वॉल्यूम (मात्रा) के हिसाब से तेल और गैस का आयात करने वाले 5 सबसे बड़े देशों का जिक्र किया गया है.
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m



