Asia longest tunnel Zojila Tunnel Final Breakthrough Video: स्ट्रेटेजिक इंफ्रास्ट्रक्चर में भारत ने आज नया इतिहास लिख दिया है। एशिया की लंबी सुरंग जोजिला टनल में ऐतिहासिक ब्रेकथ्रू सफलतापूर्वक कर लिया गया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) जम्मू-कश्मीर के सोनमर्ग पहुंचकर एक बटन दबाया और 13.153 किलोमीटर लंबी जोजिला टनल का दोनों छोर आपस में मिल गया। इसी के साथ भारत और हमारे इंजीनियरों ने एक नई इबारत लिख दी।

एशिया की लंबी सुरंग श्रीनगर-लेह नेशनल हाईवे पर स्थित है। इसके बनने के बाद बर्फबारी में भी श्रीनगर से लेह जाने वाली गाड़िय़ों के पहिए नहीं थमेंगे। वर्तमान में ठंड में भारी बर्फबारी के कारण लेह देश के अन्य हिस्सों से कट जाता है। इसके बनने के बाद लेह 365 दिन जम्मू-कश्मीर और देश के दूसरे हिस्सों से जुड़ेगा।

जोजिला टनल 11,500 फीट से अधिक ऊंचाई पर बनाई जा रही है। फरवरी 2028 तक सुरंग का निर्माण पूरा करने का लक्ष्य है। यह सुरंगश्रीअमरनाथ यात्रा के आधार शिविर बालटाल को लद्दाख के द्रास जिले के मीनामर्ग से जोड़ेगी। यह एक बेहद खास सड़क सुरंग है। 13.153 किलोमीटर लंबी सुरंग दुनिया की सबसे लंबी सिंगल-ट्यूब बाईडायरेक्शनल (दोनों तरफ से वाहनों के आने-जाने वाली) सुरंग है। मुख्य सुरंग के ठीक बराबर एक और 14.15 किलोमीटर लंबी एस्केप टनल भी तैयार की गई है, यानी कुल मिलाकर 28 किलोमीटर से ज्यादा खुदाई हुई है। दोनों टनलों को हर 500 मीटर पर क्रॉस-पैसेज से जोड़ा गया है ताकि एक से दूसरी में जल्दी पहुंचा जा सके।

सर्दियों में भारी बर्फबारी और हिमस्खलन से लेह देश के हिस्सों से कट जाता है

बता दें कि श्रीनगर-लेह नेशनल हाईवे भारी बर्फबारी और हिमस्खलन की वजह से सर्दियों के तीन से 4 महीनों के लिए पूरी तरह बंद हो जाता है। इससे लद्दाख का संपर्क देश से कट जाता है। हालांकि इस ऑल-वेदर सुरंग के पूरी तरह शुरू हो जाने के बाद कश्मीर घाटी और लद्दाख के बीच साल भर निर्बाध संपर्क हो सकेगा। इसके बनने से सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि जोजिला दर्रे को पार करने में पहले जहां 1 से 1.5 घंटे का समय लगता था, वो सफर अब महज 15 मिनट का रह जाएगा।

कैसे बनी इतनी बड़ी और मुश्किल सुरंग?

जोजिला सुरंग की नींव 19 मई 2018 को पीएम नरेंद्र मोदी ने रखी थी। उस समय इसकी अनुमानित लागत 6,800 करोड़ रुपये थी। इसे 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि निर्माण की जिम्मेदारी शुरू में IL&FS कंपनी को दी गई, लेकिन कंपनी भारी आर्थिक संकट में फंस गई और काम ठप हो गया। दो साल बाद फिर 2020 में मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर्स लिमिटेड (MEIL) ने प्रोजेक्ट को हैंडओवर किया गया और काम शुरू हुआ।

भिलाई इस्पात संयंत्र ने सप्लाई की खास किस्म की स्टील

इस टनल को बनाने में सेल (SAIL) की भिलाई इस्पात संयंत्र ने 31,000 टन खास किस्म का स्टील सप्लाई किया। इस स्टील का इस्तेमाल टनल की लाइनिंग, रॉक बोल्ट और दूसरी संरचनाओं में हुआ है। तैयार सुरंग 10 मीटर चौड़ी और 7.5 मीटर ऊंची है, जिसमें बड़ी गाड़ियां भी आराम से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेंगी।

चीन-पाकिस्तान से मुकाबला अब और आसान  

यह सुरंग भारतीय सेना के लिए भी गेम-चेंजर साबित होगी। जोजिला टनल सेना को लद्दाख और सियाचिन तक हर मौसम में टैंक, तोपें और भारी हथियार तेजी से पहुंचाने की ताकत देती है। अभी तक लाइन ऑफ कंट्रोल से सटी NH-1D सड़क पर पाकिस्तानी गोलाबारी और घुसपैठ का खतरा हमेशा बना रहता था, लेकिन अब इस सुरंग के जरिए सेना कारगिल, लेह और आगे चीन से लगी LAC तक बेहद सुरक्षित और तेज रफ्तार से पहुंच सकेगी। सर्दियों में टुकड़ियों की तैनाती और रसद आपूर्ति अब हवाई जहाजों के भरोसे नहीं रहेगी, जिससे करोड़ों रुपये की बचत भी होगी।

जोजिला टनल से जुड़ी खास बातें

  • 2018 मई में प्रधानमंत्री मोदी ने 13.153 किमी लंबी सुरंग का शिलान्यास किया।
  • 2020 में इसके निर्माण की जिम्मेदारी मेघा इंजीनियरिंग को मिली थी।

टनल से क्या होंगे फायदे

  • लेह (लद्दाख) और श्रीनगर का संपर्क इस सुरंग के माध्यम से हमेशा के लिए जुड़ जाएगा।
  • 13.153 KM लंबी इस रणनीतिक और बेहद महत्वपूर्ण सुरंग का मुख्य निर्माण कार्य पूरा होते ही, भारतीय सेना और आम नागरिकों को लद्दाख तक हर मौसम (सदाबहार) में सुरक्षित संपर्क मिल जाएगा।
  • बर्फबारी के कारण लद्दाख का कई माह तक देश से सड़क संपर्क कट जाता है, लेकिन इस सुरंग के बन जाने से ऐसा नहीं होगा।
  • कश्मीर के सोनमर्ग के पास जेड-मोड़ टनल पहले ही शुरू हो चुकी है। ऐसे में जोजि ला सुरंग पूरी होने के बाद लद्दाख के लिए सर्दियों में भी संपर्क बना रहेगा।

सुरंग के बारे में कुछ रोचक तथ्य

  • 6,809 करोड़ रुपये की लागत आएगी इस सुरंग के निर्माण में।
  • पहले दस हजार करोड़ का टेंडर था, जिसे रद कर दिया गया, इस तरह देश के 4000 करोड़ बचे।
  • 4509 करोड़ रुपये है टनल के सिविल कार्यों की लागत।
  • 1 करोड़ घंटे मानव श्रम सृजित हुए इस महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट में।
  • 17.03 किलोमीटर सड़क बनाई गई ताकि निर्माण सुचारू रहे।

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