पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में हुए जहरीली शराब कांड से मौतें ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। जहरीली शराब कांड के बाद शासन और प्रशासन अब पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। जहरीली शराब पीने से मरनेवालों की संख्या बढ़ते बढ़ते 24 तक हो गयी है. महाराष्ट्र सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए पुलिस और राज्य उत्पाद शुल्क विभाग के 21 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को एकसाथ सस्पेंड कर दिया है.

इस दर्दनाक घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है. अब तक कुल 22 आरोपियों की गिरफ़्तारी हो चुकी है. साथ ही भिवंडी से 5,929 लीटर मेथेनॉल भी बरामद हुआ है.

राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने पुलिस आयुक्तों को मौतों के कारणों का पता लगाने का निर्देश दिया था और दोषियों को सजा दिलाने का वादा किया था। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर काम में लापरवाही और निगरानी में कमी के आरोप में 21 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निलंबन की यह कार्रवाई की गई है.

प्रशासन का मानना है कि समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जाती तो यह घटना टाली जा सकती थी. जिससे इतनी बड़ी जनहानि की गुंजाइश नहीं होती. जांच के दौरान इस जहरीली शराब कांड के तार ठाणे जिले के भिवंडी से जुड़ते नजर आ रहे हैं.

नागपुर में पुलिस और उत्पाद शुल्क विभाग ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए 43 स्थानों पर छापेमारी की और 56 लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए. खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने भिवंडी के एक गोदाम पर छापा मारकर 5,929 लीटर मेथेनॉल बरामद किया है.

पुणे कांड के बाद राज्यभर में अवैध शराब के खिलाफ अभियान तेज कर दिया गया है. राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को मुख्यमंत्री सहायता निधि से 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है.

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