आंध्र प्रदेश के बापटला जिले से एक बेहद भावुक मामला सामने आया है। 94 वर्षीय कोंड्रागुंटा महालक्ष्मम्मा ने भारत सरकार से भारतीय नागरिकता दोबारा देने की अपील की है। उनका कहना है कि वह अपने जीवन के अंतिम दिन अपनी मातृभूमि में बिताना चाहती हैं और एक भारतीय नागरिक के रूप में ही इस दुनिया से विदा लेना चाहती हैं।
बेटे के पास अमेरिका गईं, फिर लौटीं अपने गांव
महालक्ष्मम्मा मूल रूप से बापटला जिले के चिनागंजम मंडल स्थित चिंथागुम्पाला गांव की रहने वाली हैं। पति नागभूषणम के निधन के बाद वह वर्ष 2000 में अपने बेटे डॉ. के. बुच्चैया चौधरी के पास अमेरिका चली गई थीं। उनके बेटे अमेरिका में एक प्रसिद्ध कैंसर सर्जन हैं। वहीं रहते हुए उन्होंने जुलाई 2000 में अमेरिकी नागरिकता ग्रहण कर ली थी। करीब 18 वर्षों तक अमेरिका में रहने के बाद वर्ष 2018 में वह भारत लौट आईं और तब से अपने पैतृक गांव में रह रही हैं।
स्वेच्छा से छोड़ी अमेरिकी नागरिकता
भारत लौटने के बाद महालक्ष्मम्मा ने स्वेच्छा से अमेरिकी नागरिकता छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने भारतीय नागरिकता दोबारा प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया, जिसके बाद उनके मामले की सुनवाई मंगलवार को बापटला के जिला कलेक्टर डॉ. वी. विनोद कुमार ने की।
भारतीय संविधान के प्रति ली निष्ठा की शपथ
सुनवाई के दौरान महालक्ष्मम्मा को भारतीय संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ तेलुगु भाषा में दिलाई गई। अधिक उम्र होने के कारण उनके बेटे ने शपथ पढ़ने में उनकी सहायता की। इसके बाद उन्होंने आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर कानूनी प्रक्रिया पूरी की।
अंतिम मंजूरी के लिए भेजी गई फाइल
जिला कलेक्टर डॉ. वी. विनोद कुमार ने बताया कि महालक्ष्मम्मा के पास अमेरिकी नागरिकता और ओसीआई (OCI) कार्ड था। उन्होंने अपनी इच्छा से भारतीय नागरिकता दोबारा लेने का निर्णय लिया है। सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उनका आवेदन और संबंधित रिपोर्ट अंतिम मंजूरी के लिए गृह मंत्रालय को भेज दी गई है।
सुनवाई के दौरान महालक्ष्मम्मा ने अधिकारियों से कहा कि वह अपना शेष जीवन अपनी मातृभूमि में बिताना चाहती हैं और उनकी अंतिम इच्छा है कि उनका अंतिम संस्कार भी भारत की धरती पर ही हो।
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