लखनऊ. नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद रावण ने बच्चियों के खिलाफ बढ़ रहे अपराध को लेकर चिंता जाहिए करते हुए सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि बच्चियों से अपराध के मामलों में आरोपियों के खिलाफ बड़ी संख्या में एफआईआर दर्ज की जा रही हैं, लेकिन उन्हें सजा दिलाने में पुलिस कहीं न कहीं नाकाम नजर आ रही है. हाल यह है कि गोरखपुर जोन में पिछले सात महीनों में बच्चियों से अपराध के मामलों में आरोपित हुए 60 प्रतिशत आरोपी सबूत और गवाहों के अभाव में छूट गए.
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चंद्रशेखर आजाद रावण ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के खुद के जिले गोरखपुर में सात महीनों में पॉक्सो के 75 मामलों का फैसला हुआ, जिनमें 44 आरोपित दोषमुक्त हो गए, जबकि केवल 31 को सजा मिली. यानी सजा पाने वालों से अधिक संख्या उन आरोपितों की रही, जो दोषमुक्त होकर बाहर निकल गए. यह स्थिति पुलिस की विवेचना और अभियोजन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है.
आगे उन्होंने ये भी कहा कि कानूनविदों के अनुसार, पॉक्सो एक्ट के मामलों में इतनी बड़ी संख्या में आरोपितों का दोषमुक्त होना बताता है कि केस दर्ज होने के बाद पुलिस की विवेचना में गंभीर कमियां रह जा रही हैं. कमजोर विवेचना, साक्ष्यों के अभाव और गवाहों के मुकर जाने का सीधा फायदा आरोपितों को ट्रायल में मिल रहा है. यही समस्या SC-ST Act से जुड़े मामलों में भी देखने को मिलती है, जहां पुलिस की कमजोर विवेचना, पैरवी और पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में आरोपितों को ट्रायल में फायदा मिलता है और पीड़ित न्याय के लिए भटकते रहते हैं.
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चंद्रशेखर आजाद रावण ने आगे कहा कि भारत सरकार से हमारी मांग है कि SC-ST Act के मामलों में पीड़ितों को मिलने वाली मुआवजा राशि को बढ़ाकर 30 लाख रुपये किया जाए और यह राशि दोषी साबित होने वाले आरोपित से वसूल की जाए. साथ ही पुलिस की विवेचना और अभियोजन व्यवस्था को जवाबदेह बनाया जाए, ताकि अपराधी कानून की कमजोरियों का फायदा उठाकर बच न पाएं और पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके.


