कुमार उत्तम/मुजफ्फरपुर। जिले में कलेक्ट्रेट परिसर आज उस समय नारों से गूंज उठा, जब ‘ड्राइवर एसोसिएशन ऑफ बिहार’ के बैनर तले सैकड़ों ड्राइवरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस विरोध प्रदर्शन में विभिन्न सरकारी विभागों, गैर-सरकारी संस्थाओं और कमर्शियल वाहनों के लाइसेंस धारक चालकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

​प्रमुख मांगें: सुरक्षा, सम्मान और भविष्य की चिंता

​एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अमरेन्द्र राय ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि ड्राइवर समाज देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन उनकी सुरक्षा और भविष्य को लेकर सरकारें उदासीन हैं। उनकी मुख्य मांगों में शामिल हैं:

​बीमा और मुआवजा: सड़क दुर्घटना को ‘आपदा’ की श्रेणी में रखा जाए। ड्यूटी के दौरान मौत होने पर 20 लाख रुपये और अपंग होने पर 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। साथ ही, ड्राइवरों के लिए एक समर्पित ‘ड्राइवर आयोग’ और ‘बीमा आयोग’ का गठन हो।

​पेंशन और सामाजिक सुरक्षा: 60 वर्ष की आयु पूरी करने वाले कमर्शियल ड्राइवरों के लिए पेंशन योजना लागू हो और उनकी मृत्यु के पश्चात उनके आश्रितों को भी पेंशन मिले।

​सुरक्षा कानून और तकनीक: गाड़ियों में 6 कैमरे अनिवार्य हों ताकि दुर्घटना के समय असली दोषी की पहचान हो सके। साथ ही, ड्राइवरों के साथ होने वाली मारपीट को रोकने के लिए सख्त ‘सुरक्षा कानून’ बने।

​विशेष दर्जा और अवकाश: 1 सितंबर को ‘ड्राइवर दिवस’ घोषित कर उस दिन अनिवार्य अवकाश दिया जाए और ड्राइवरों को ‘द्वितीय श्रेणी के सैनिक’ का दर्जा प्राप्त हो।

​चिकित्सा सुविधा: हर सरकारी अस्पताल के ICU में कम से कम एक बेड ड्राइवरों के लिए आरक्षित हो।

​सरकार को दो टूक चेतावनी

​अमरेन्द्र राय ने कहा कि अगर सरकार जल्द ही इन 10 सूत्री मांगों पर संज्ञान नहीं लेती है, तो यह आंदोलन केवल मुजफ्फरपुर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे प्रदेश में चक्का जाम और उग्र प्रदर्शन किया जाएगा।