Rajasthan News: राजस्थान के सरकारी महकमों में मची हलचल के बीच मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के खिलाफ सीधी सर्जिकल स्ट्राइक कर दी है। हैरानी की बात यह है कि एक साथ 50 से अधिक पुराने लटके हुए मामलों को निपटाते हुए सरकार ने सीधे सख्त रुख अपना लिया है। अब उन अधिकारियों की नींद उड़ गई है जो पद का दुरुपयोग कर जनता की गाढ़ी कमाई पर डका मार रहे थे।

बता दें कि सीएम ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कई आला अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। इसमें उपखंड अधिकारी से लेकर पीडब्ल्यूडी और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं, जिन पर निजी व्यक्तियों को अवैध फायदा पहुंचाने का गंभीर आरोप है।

कुर्सी से हाथ धो बैठे अधिकारी, पेंशन पर भी चला कैंची

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सरकार ने उन अधिकारियों को कतई बख्शने का मन नहीं बनाया है जो अपनी ड्यूटी से नदारद थे या सरकारी खजाने को चूना लगा रहे थे। लंबे समय से बिना सूचना के गायब रहने वाले एक अधिकारी को तो सीधे सेवा से ही बर्खास्त कर दिया गया है। वहीं, एक तत्कालीन कृषि उपज मंडी सचिव को न्यायालय से दोषी पाए जाने के बाद बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।

दरअसल, मामला सिर्फ बर्खास्तगी तक ही सीमित नहीं है। सीएम ने कई अधिकारियों की इंक्रीमेंट (वेतन वृद्धि) पर रोक लगा दी है और कुछ मामलों में तो पेंशन तक रोकने के निर्देश दिए हैं। विकास अधिकारी के खिलाफ तो सीधे भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की नई धाराओं के तहत जांच का रास्ता साफ कर दिया गया है, जिससे महकमे में हड़कंप मचा है।

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का संदेश

बता दें कि मुख्यमंत्री ने जहां भ्रष्टाचार के मामलों में कठोरता दिखाई है, वहीं उन अफसरों के लिए भी राहत की खबर है जो विभागीय जांच में बेदाग पाए गए हैं। तीन मामलों में अधिकारियों को दोषमुक्त भी किया गया है। इससे स्पष्ट है कि अब सरकारी दफ्तरों में अब मनमानी नहीं चलेगी। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद से सरकारी गलियारों में सन्नाटा पसरा है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़े चेहरे जांच के घेरे में आ सकते हैं।

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