Bihar Police Encounter: सारण जहरीली शराब कांड मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। कल रविवार की देर रात शराब माफियाओं और पुलिस के बीच मुठभेड़ हुई है। मुठभेड़ के दौरान एक आरोपी के पैर में गोली लगी है, जिसके बाद घायल होकर वह वहीं गिर पड़ा फिर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। इसके बाद पुलिस उसे इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंची, जहां पुलिस की निगरानी में उसका इलाच चल रहा है। बता दें कि यह मुठभेड़ मशरक और पानापुर थाना क्षेत्र के बॉर्डर वाले इलाके में हुई है।

घटना के बाद से फरार था आरोपी

गिरफ्तार आरोपी की पहचान सूरज महतो (26) पुत्र मन्नी महतो के रूप में हुई है, जो पानापुर थाना क्षेत्र के मिथवा गांव का रहने वाला है। सूरज महतो जहरीली शराब सप्लाई मामले में संदिग्ध था, जो घटना के बाद से फरार चल रहा था। गौरतलब है कि बीते दिनों जिले के मशरक और पानापुर थाना क्षेत्र में कथित तौर पर जहरीली शराब का सेवन करने पर 5 लोगों की मौत हो गई थी।

छपरा में हुई थी 5 लोगों की मौत

दरअसल बिहार सरकार भले ही शराबबंदी के नाम पर अपनी पीठ थपथपाती हो, लेकिन दावे ठीक इसके उलट नजर आते हैं। छपरा में एक बार फिर से जहरीली शराब का तांडव देखने को मिला, जहां दो दिनों (11 व 12 मार्च) में एक के बाद एक करके कुल पांच लोगों की मौत हो गई। इनमें से दो की मौत पानापुर थाना और तीन की मौत मशरक थाना क्षेत्र में हुई। इनमें से कुछ मृतकों के परिजनों ने शराब पीने की बात कबूल की है। हालांकि प्रशासन इन मौतों के पीछे बीमारी होने की बात कह रहा है।

मृतकों के शराब पीने की बात आई सामने

मशरक में बीते बुधवार (11 मार्च) की रात संतोष महतो की मौत हो गई। संतोष के परिजनों ने उसके शराब पीने की बात कही। वहीं, अन्य मृतकों की मौत कैसे हुई? इस बात की जानकारी अभी सामने नहीं आई है। आशंका जताई जा रही है कि इन सभी की मौत जहरीली शराब का सेवन करने की वजह से हुआ होगा। मृतकों की पहचान पानापुर के सुखल नट और धर्मेंद्र राय के रूप में हुई है। जबकि मशरक के संतोष महतो, रघुवर महतो और धर्मेंद्र सिंह के रूप में हुई है।

आखों की चली गई थी रोशनी

एक तरफ जहां, प्रशासन शराब पीने से मौत की बातों को इंकार कर रहा है। वहीं, मृतक संतोष महतो की पत्नी लालमुनि देवी ने बताया कि, मेरा पति रात (गुरुवार, 12 मार्च ) में घर आया, दूध-रोटी खाकर सो गया। सुबह उठने पर उसने पेट में दर्द होने की बात कही और उसकी आंखों से दिखाई भी नहीं दे रहा था। उन्होंने बताया कि, संतोष ने चार बार उल्टी भी की, जिसके बाद हम लोग उसे तुरंत सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां, डॉक्टर ने उसे रेफर कर दिया।

परिजनों ने बताया कि, संतोष ने मरते-मरते बस यही कह रहा था की उसे आंखों से कुछ दिखाई नहीं दे रहा। इलाज के दौरान उसने शराब पीने की बात बताई थी। पर्ची पर भी इसका जिक्र किया गया है।

प्रशासन ने शराब से मौत को किया इंकार

घटना को लेकर मशरक के एसडीपीओ संजय कुमार सुधांशु ने बताया कि, शराब पीने से मौत की जानकारी नहीं मिली है। मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि, पहली नजर में लीवर के खराब होने से मौत की आशंका है।

वहीं, डीपीआरओ रविंद्र कुमार ने घटना के संबंध में बताया कि, जांच के दौरान पता चला है कि मृतक संतोष महतो की अपनी पत्नी से कुछ दिनों पहले विवाद हुआ था, जिसे लेकर वह मानसिक रूप से परेशान चल रहा था। 3-4 दिनों से उसने ठीक से खाना भी नहीं खाया था। उन्होंने संतोष की मौत के पीछे बीमारी की बात कही है। हालांकि परिजनों का कहना है कि शराब पीने से उसकी मौत हुई है।

कुछ ने बिना सूचना दिए किया अंतिम संस्कार

क्या सच है क्या झूठ? यह जांच का विषय है। मिली खबरों के मुताबिक जिले में कई और लोगों की तबीतय खराब है और उनके आंखों की रोशनी चली गई है। हालांकि परिजन पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए चोरी-छिपे इलाज कर रहे हैं। वहीं, बिना पुलिस को सूचना दिए ही मृतकों का भी अंतिम संस्कार कर दिया गया।

2016 से बिहार में है शराबबंदी

गौरतलब है कि बिहार में साल 2016 से पूर्ण रूप से शराबबंदी लागू है, जिसके तहत राज्य में शराब उत्पादन, बिक्री और सेवन करना कानून अपराध है। हालांकि बावजूद इसके शराब की तस्करी का अवैध कारोबार अब तक पूरी तरह से थम नहीं पाया है। वहीं, समय-समय पर जहरीली शराब पीने से लोगों के मौत की खबरें सामने आती रहती हैं। 2022 और 2024 में भी जहरीली शराब पीने की वजह से कई लोगों ने अपनी जान गंवाई थी।

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