असम विधानसभा चुनाव के लिए गुवाहाटी में निर्मला सीतारमण, सीएम हिमंता बिस्वा सरमा, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया एवं पार्टी के अन्य नेताओं की मौजूदगी में ‘संकल्प पत्र’ जारी हुआ। बीजेपी चुनावी घोषणापत्र को ‘संकल्प पत्र’ कहती है। चुनावी ‘संकल्प पत्र’ जारी करने के बाद वित्त मंत्री ने कहा कि ‘यह घोषणापत्र एक दशक तक लोगों की सेवा करने के बाद तैयार हुआ है। CM सरमा ने राज्य में यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड और दो लाख नौकरियों का वादा किया.
भाजपा चुनावी घोषणापत्र को ‘संकल्प पत्र’ कहती है। असम में विधानसभा की 126 सीटों के लिए एक चरण में 9 अप्रैल को मतदान होगा और चुनाव नतीजे 4 मई को घोषित होंगे।
राज्य में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच है। चुनाव के लिए राज्य में सियासी सरगर्मी काफी बढ़ी हुई है। असम विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मंगलवार को अपना ‘संकल्प पत्र’ जारी कर दिया। गुवाहाटी में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया एवं पार्टी के अन्य नेताओं की मौजूदगी में ‘संकल्प पत्र’ जारी हुआ।
असम चुनाव: बीजेपी के घोषणापत्र की प्रमुख बातें-:
हम असम में UCC लागू करेंगे, जिसमें छठी अनुसूची, ST इलाके शामिल नहीं हैं. हम लव जिहाद के खिलाफ़ कड़े कदम उठाएंगे. हम असम को बाढ़-मुक्त बनाने की कोशिश करेंगे, और पहले दो सालों में हम 18,000 करोड़ रुपये खर्च करेंगे. हम अगले 5 सालों में 2 लाख नौकरियां देंगे. हम एक ज़िला, एक मेडिकल कॉलेज, एक यूनिवर्सिटी, एक इंजीनियरिंग कॉलेज बनाना चाहते हैं. असम BJP अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने कहा कि BJP का लक्ष्य सुरक्षित असम, एक विकसित असम बनाना है. 2026 का चुनाव असम के लोगों के लिए बहुत ज़रूरी चुनाव है. BJP यह चुनाव एक सुरक्षित असम बनाने के मकसद से लड़ रही है. हम इस चुनाव के लिए तैयार हैं.
राज्य कई मायनों में पूरी तरह से बदल चुका है। असम पर कांग्रेस का शासन करीब छह दशकों तक रहा लेकिन उसने राज्य के विकास के लिए कोई काम नहीं किया।’ असम में चुनावी पारा काफी गर्म हो चुका है। चुनाव प्रचार में राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी और अपने विरोधियों पर तीखे हमले कर रहे हैं।
पीएम ने आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस शासन में शांति समझौतों को नजरअंदाज किया गया और युवाओं को परेशानी झेलनी पड़ी, जिससे वे अशांति की ओर बढ़े। उन्होंने कहा, “कांग्रेस शासन के दौरान असम में उग्रवादी और छात्र संगठनों के साथ कोई भी समझौता सफल नहीं हुआ। कांग्रेस ने बोडो मुद्दे के साथ विश्वासघात किया।”
प्रधानमंत्री ने कहा , ‘हमने वह दौर देखा है जब असम हिंसा में जल रहा था। आज हम एक नया आत्मविश्वास देख सकते हैं क्योंकि भाजपा की डबल-इंजन सरकार ने शांति के लिए हरसंभव प्रयास किया है।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं को लोगों को याद दिलाना चाहिए कि कांग्रेस ‘सिर्फ कागजों पर और सुर्खियां बनाने व लोगों को गुमराह करने के लिए समझौते करती थी।’
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