भारतीय रेलवे ने तकनीकी विकास की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ाते हुए देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन आधारित ट्रेन के ट्रायल को मंजूरी दे दी है। रेलवे बोर्ड ने 22 मई 2026 को आरडीएसओ और उत्तरी रेलवे को जारी पत्र में 10 कोच वाली हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन की अनुमति प्रदान की।

रेलवे के अनुसार यह अत्याधुनिक ट्रेन दिल्ली मंडल के जींद-सोनीपत सेक्शन पर अधिकतम 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाई जाएगी। इसे भारतीय रेलवे के ग्रीन ट्रांसपोर्ट मिशन की अहम उपलब्धि माना जा रहा है।

रेलवे बोर्ड ने क्या कहा?

रेलवे बोर्ड द्वारा जारी पत्र में बताया गया कि रेलवे सुरक्षा आयुक्त की सिफारिश के बाद 1200 किलोवाट क्षमता वाले हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित डीएमयू कोचों को संचालन की मंजूरी दी गई है। यह ट्रेन 10 डिब्बों के साथ तय रूट पर परीक्षण के लिए दौड़ेगी।

दुनिया के चुनिंदा देशों की सूची में शामिल होगा भारत

सूत्रों के मुताबिक ट्रेन का तकनीकी परीक्षण पूरा हो चुका है। यह मूल्यांकन अनुसंधान डिजाइन एवं मानक संगठन (RDSO) की निगरानी में किया गया। व्यावसायिक सेवा शुरू होने के बाद भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जहां हाइड्रोजन ट्रेनें संचालित होती हैं। इस सूची में जर्मनी, जापान, चीन और स्वीडन जैसे देश पहले से शामिल हैं।

क्या हैं इस ट्रेन की खासियतें?

यह दुनिया का सबसे लंबा ब्रॉड गेज हाइड्रोजन ट्रेनसेट माना जा रहा है।
ट्रेन में कुल 10 कोच होंगे।
इसमें 1200-1200 किलोवाट की दो ड्राइविंग पावर कार लगाई गई हैं।
कुल पावर क्षमता 2400 किलोवाट होगी।
ट्रेन से कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन नहीं होगा।
संचालन के दौरान केवल जल वाष्प निकलने से यह पर्यावरण के लिए बेहद अनुकूल मानी जा रही है।

रखरखाव और संचालन के लिए विशेष व्यवस्था

रेलवे ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इस ट्रेन को केवल जींद-सोनीपत रूट पर चलाने की अनुमति दी गई है। वहीं ट्रेन का नियमित रखरखाव शकूरबस्ती में किया जाएगा। इसके अलावा जींद-शकूरबस्ती मार्ग पर ट्रेन की आवाजाही मौजूदा सुरक्षा नियमों के तहत सुनिश्चित की जाएगी। भारतीय रेलवे की यह पहल देश को हरित और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की ओर ले जाने वाला बड़ा कदम मानी जा रही है।

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