गन्नौर के ऋषि चैतन्य आश्रम में आज आध्यात्मिक उत्सव की धूम रही। परम पूज्या आनंदमूर्ति गुरुमाँ का 60वां अवतरण दिवस श्रद्धा के साथ मनाया गया। देश-विदेश से पहुंचे हजारों साधकों ने गुरुमाँ के अमृतमयी सत्संग का लाभ उठाया। वहीं, सुप्रसिद्ध बाल गायिका सूर्यगायत्री की भक्तिपूर्ण प्रस्तुति ने पूरे माहौल को भक्तिमय कर दिया।

गन्नौर, सोनीपत। हरियाणा के गन्नौर स्थित ऋषि चैतन्य आश्रम में परम पूज्या आनंदमूर्ति गुरुमाँ का 60वां अवतरण दिवस अपार श्रद्धा और आध्यात्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर देश-विदेश से हजारों की संख्या में साधक आश्रम पहुंचे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण गुरुमाँ का अमृतमयी सत्संग और सुप्रसिद्ध बाल गायिका सूर्यगायत्री की भक्तिपूर्ण सांगीतिक प्रस्तुति रही।

मानव जीवन की सार्थकता पर गुरुमाँ का पावन संदेश

समारोह का शुभारंभ गुरुमाँ के ज्ञानवर्धक प्रवचन से हुआ, जिसमें उन्होंने जीवन की वास्तविक दिशा और उसकी सार्थकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि केवल भौतिक सुख-सुविधाओं का संचय करना मानव जीवन का लक्ष्य नहीं है, बल्कि आत्मज्ञान की प्राप्ति ही इसकी वास्तविक पूर्णता है। गुरुमाँ ने समझाया कि जो व्यक्ति केवल क्रोध, मोह और द्वेष जैसी तामसिक वृत्तियों में जीता है, वह स्वयं और दूसरों के लिए पीड़ा का कारण बनता है। उन्होंने बल दिया कि मनुष्य की महानता उसके भौतिक निर्माणों में नहीं, बल्कि अपने भीतर स्थित सच्चिदानंद परब्रह्म को जानने में निहित है।

संसार की नश्वरता और वेदांत का मर्म

वेदांत के गूढ़ रहस्यों को सरल शब्दों में साझा करते हुए गुरुमाँ ने कहा कि यह संसार एक स्वप्न के समान नाशवान है। उन्होंने साधकों को उपनिषद, गीता और गुरबाणी के ज्ञान को आत्मसात कर जीवन को सत्यम, शिवम और सुंदरम बनाने के लिए प्रेरित किया। गुरुमाँ ने उन सिद्ध महापुरुषों का भी वर्णन किया जो एकांत में कठिन तपस्या कर संसार के कल्याण के लिए अपनी ऊर्जा समर्पित कर रहे हैं। उन्होंने साधकों को मूल मंत्र देते हुए कहा कि जो शांति आप आश्रम में अनुभव करते हैं, उसे बाहरी जगत में भी बनाए रखें। जीवन को चिंता और क्रोध की अग्नि में व्यर्थ करने के बजाय ज्ञान की अग्नि में तपाकर कुंदन बनाएं।

भक्ति रस से सराबोर सांगीतिक प्रस्तुति

सत्संग के पश्चात विख्यात गायिका सूर्यगायत्री ने अपनी मधुर प्रस्तुति से संपूर्ण वातावरण को भक्तिमय कर दिया। उन्होंने गणेश वंदना और देवी स्तोत्र के साथ गायन का आरंभ किया। इसके उपरांत ‘ऐसी लागी लगन’ और ‘अच्युतम केशवम’ जैसे भजनों ने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया। हनुमान चालीसा के पाठ ने पंडाल में नई ऊर्जा का संचार किया। कार्यक्रम का भावपूर्ण समापन प्रसिद्ध भजन ‘ब्रह्म ओकटे परब्रह्म ओकटे’ के साथ हुआ। इस भव्य आयोजन ने उपस्थित सभी साधकों को आध्यात्मिक आनंद और शांति की गहरी अनुभूति कराई।