Cleanliness is next to godliness. – स्वच्छता भगवान के समान है.

स्वच्छता, शारीरिक सफाई, मानसिक शांति, अच्छे स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा का आधार है. ”स्वच्छता ईश्वर के समान है” (Cleanliness is next to godliness) का भाव यह दर्शाता है कि पवित्रता और निर्मलता में ही हमारे इष्ट का वास होता है. इस धारणा का समर्थन करता हुआ एक श्लोक है स्वच्छता हि सेवा, स्वच्छता धर्मः.यत्र स्वच्छता तत्र सुखं वसति॥ जिसका अर्थ है स्वच्छता ही सेवा और धर्म है. जहाँ स्वच्छता निवास करती है, वहीं सुख का वास होता है.

प्राचीन काल से ही हमारी संस्कृति में “स्वच्छता” को एक दैनिक आदत के अलावा आध्यात्मिक उन्नति और ईश्वर प्राप्ति का अनिवार्य साधन समझा जाता रहा है. ”Cleanliness is next to godliness” की अवधारणा भी इसी परम सत्य की पुष्टि करती ह. स्वयं की सफाई से भीतर एक अद्भुत दिव्यता (ईश्वर) का अनुभव कराने वाली सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.बाहय परिवेश की स्वच्छता रोगों को दूर रखती है. जिस प्रकार दर्पण पर जमी धूल को साफ करने के बाद ही उसमें स्पष्ट प्रतिबिंब दिखाई देता है ठीक वैसा ही स्वच्छता हमारे विचारों और बुद्धि के विकारों को दूर करती है. जब स्थान शुद्ध और वायु स्वच्छ होती है तब ही मन ध्यान और साधना में एकाग्रता से लग पाता है.

धर्म ग्रंथों के अनुसार शुद्ध और स्वच्छ वातावरण में ही माँ लक्ष्मी और अन्य देवताओं का वास होता है. स्वच्छता जीवन में अनशासन के साथ सात्विकता लाती है. वास्तविक अर्थों में, स्वच्छता हमें निरोगी बनाकर मन से द्वेष, लोभ और अहंकार वाली गंदगी को मिटाकर हमें ईश्वर के करीब ले जाती है. सांक्षेप में कह सकते हैं कि स्वच्छ और निर्मल जीवन ही भगवान का सच्चा मंदिर है.

संदीप अखिल

सलाहकार संपादक

न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम

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