अनिल सक्सेना, रायसेन। बुंदेलखंड की लोक आस्था और सदियों पुरानी परंपरा का अनोखा नज़ारा रायसेन जिले के सुल्तानगंज क्षेत्र के ग्राम मढ़िया गुसाई में देखने को मिला। अल्प वर्षा से खेतों में खड़ी फसलें सूखने की कगार पर पहुंचने के बाद गांव की महिलाओं ने इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए पारंपरिक सैरा (डांडिया) नृत्य किया। गांव की खेड़ापति माई और हनुमान मंदिर के सामने सैकड़ों वर्षों से चली आ रही इस लोक परंपरा को पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ निभाया गया।

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करीब दो घंटे तक महिलाएं पारंपरिक गीतों की मधुर धुन पर सैरा नृत्य करती रहीं। ग्रामीणों का मानना है कि जब सूखे जैसी स्थिति बन जाती है और इंद्रदेव रुष्ट हो जाते हैं, तब महिलाएं यह लोक अनुष्ठान करती हैं। मान्यता है कि नृत्य तब तक जारी रहता है, जब तक वर्षा शुरू न हो जाए। इस बार भी ऐसा ही हुआ।

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जैसे ही महिलाओं की सामूहिक प्रार्थना और नृत्य अपने चरम पर पहुंचा, आसमान में बादल छा गए और बारिश शुरू हो गई। बारिश होते ही पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। पिछले एक सप्ताह से बारिश नहीं होने के कारण किसान चिंतित थे, लेकिन इस अनोखी लोक परंपरा ने एक बार फिर ग्रामीणों की आस्था और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया।

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