भारतीय न्याय व्यवस्था में अब AI की एंट्री होने जा रही है. सुप्रीम कोर्ट ने भारत की अदालतों में एआई के औपचारिक इस्तेमाल को लेकर रेगुलेशन्स फार यूज ऑफ एआई इन कोर्ट 2026 का ड्राफ्ट जारी कर सभी हितधारकों और आमजनता से सुझाव भी आमंत्रित किये है. भारतीय न्याय व्यवस्था में हो रहे इस व्यापक बदलाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने प्रौद्योगिकी को हमेशा इंसानी सोच-समझ में मदद करने के साधन के रूप में देखा है, ना कि न्यायाधीशों की स्वतंत्र सोच और फैसले लेने की क्षमता के विकल्प के रूप में. CJI सूर्यकांत ने कहा कि भारतीय परिस्थितियों और मूल्यों के अनुरूप न्यायिक सिद्धांतों को विकसित करने पर काफी जोर दिया गया है.

ऑक्सफोर्ड यूनियन और ऑक्सफोर्ड लॉ सोसाइटी में कॉन्स्टिट्यूशनल प्रॉमिस टू डिजिटल रियलिटी: सेफगार्डिंग जस्टिस इन द एज ऑफ एआई एंड टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट विषय पर अपने संबोधन में प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि पहले से जारी प्रौद्योगिकी से जुड़ीं पहलों के अलावा, न्यायपालिका के लिए एक स्वदेशी एआई प्रणाली विकसित करने की संभावनाओं पर गंभीरता से काम किया जा रहा है.

AI कभी नहीं लेगा न्यायाधीशों की जगह

CJI सूर्यकांत बोले, ‘भारत के उच्चतम न्यायालय ने प्रौद्योगिकी को हमेशा इंसानी सोच-समझ में मदद करने के साधन के रूप में अपनाया है, न्यायाधीशों की स्वतंत्र सोच और फैसले लेने की क्षमता के विकल्प के रूप में नहीं. साथ ही, ऐसे ‘स्वदेशी न्यायशास्त्र’ के विकास पर विशेष जोर दिया गया है, जिसमें भारत के संवैधानिक मूल्यों, संस्थागत वास्तविकताओं, भाषाई विविधता और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखा गया हो और केवल विदेश से आए तकनीकी मॉडल या धारणाओं पर निर्भर न हो.’

युवा बना रहे नई न्यायपालिका

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि युवा वकील, न्यायिक अधिकारी और विधिक पेशेवर न्यायपालिका के तकनीकी परिवर्तन के लिए एक उत्साहवर्धक स्रोत हैं. प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘मैं कानून के क्षेत्र के युवाओं की बात कर रहा हूं. भारत में ऐसे युवा आसानी से खुद को प्रौद्योगिकी के अनुरूप ढाल लेते हैं, चाहें वह जिला न्यायालय का न्यायिक अधिकारी हो, चाहे वह सरकारी वकील हो और यहां तक कि वे लोग भी, जो कॉर्पोरेट संस्थाओं को कानूनी सलाहकार के रूप में सहायता प्रदान करते हैं.’ उन्होंने कहा कि ये युवा भारतीय न्यायपालिका में इन सभी सुधारात्मक परिवर्तनों को लाने में वास्तव में एक अत्यंत उत्साहवर्धक सूत्रधार रहे हैं.

4 जून को CJI का हुआ था विरोध

बता दें कि, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत द्वारा 4 जून को लंदन में भी लेक्चर दिया गया था लेकिन तब उसमें भारी हंगामा हो गया. उस कार्यक्रम में ‘कॉकरोच’ वाली उनकी टिप्पणी और भारत में असहमति की आवाज को लेकर सवाल पूछे गए थे. सीजेआई सूर्यकांत 4 जून को बर्कबेक यूनिवर्सिटी लंदन में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटरनेशनल लॉ’ पर अपने भाषण के बाद सवाल-जवाब का सामना कर रहे थे. इस बीच कार्यक्रम में शामिल एक और प्रतिभागी ने सीजेआई से 15 मई को भारत में की गई उनकी ‘कॉकरोच’ वाली टिप्पणी के बारे में सवाल किया. हालाँकि, मॉडरेटर ने बातचीत को बीच में ही रोक दिया और मॉडरेटर ने कहा, ‘सभी का सम्मान करते हुए कहना चाहता हूँ कि मैं यह सवाल नहीं ले सकता क्योंकि हमारा विषय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटरनेशनल लॉ से जुड़ा है.’

इसके बाद कुछ लोग खड़े हो गए और विरोध जताने लगे. आयोजकों ने बार-बार दर्शकों से शांति बनाए रखने की अपील की. एक क्लिप में यह कहते सुना गया, ‘कृपया शांत हो जाइए, इसे यहीं खत्म करते हैं.’

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