लखनऊ में शिक्षक सम्मान समारोह के दौरान अखिलेश यादव ने शिक्षा व्यवस्था से लेकर सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण तक कई मुद्दों पर अपनी बात रखी. उन्होंने भाजपा पर हमला करते हुए दूसरे धर्मों की आस्था का सम्मान करने को सनातन धर्म की भावना से जोड़ा.
लखनऊ. शिक्षक सम्मान समारोह में शामिल हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शनिवार को शिक्षा व्यवस्था समेत कई राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बात रखी. सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण के मामले को लेकर उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि दूसरे धर्मों का सम्मान नहीं करने वाले लोग सच्चे सनातनी कैसे हो सकते हैं.
लखनऊ पब्लिक स्कूल्स एंड कॉलेजेस में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में अखिलेश यादव मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थे. उन्होंने शिक्षकों को समाज और आने वाली पीढ़ी का मार्गदर्शक बताया.
प्राइमरी स्कूलों का मुद्दा
अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश में करीब 26 हजार प्राइमरी स्कूल बंद हो गए हैं. उन्होंने सत्ता में आने पर इन स्कूलों को दोबारा खोलने का वादा किया.
मस्जिद ध्वस्तीकरण पर बयान
सहारनपुर में अवैध मस्जिद के ध्वस्तीकरण के मुद्दे पर सपा प्रमुख ने कहा कि जो लोग दूसरे धर्मों का सम्मान नहीं करते, वे सच्चे सनातनी नहीं हो सकते. उनके अनुसार, दूसरों की आस्था के साथ खिलवाड़ करना सनातन धर्म की भावना के विपरीत है.
उन्होंने कहा कि सच्चा हिंदू कभी किसी दूसरे व्यक्ति का अपमान नहीं करता. ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का उल्लेख करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि सनातन धर्म पूरी धरती और समाज को एक परिवार मानने की सीख देता है.
राम मंदिर चंदे पर आरोप
राम मंदिर चंदे के मुद्दे पर भी अखिलेश यादव ने भाजपा पर हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि ‘राम धन’ का गबन करने वाले लोग अब घबराए हुए हैं और इस मामले को सांप्रदायिक मुद्दा बनाने का रास्ता तलाश रहे हैं.
अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा अपने पुराने दौर में धर्मनिरपेक्ष छवि दिखाने के लिए मुस्लिम समुदाय के लोगों को भी साथ लेकर चलती थी. उन्होंने दावा किया कि पार्टी के पहले अध्यक्ष की नियुक्ति के समय उसके चंदे में मुस्लिम समाज की भी बड़ी हिस्सेदारी थी और एक मुस्लिम व्यक्ति को अध्यक्ष का प्रस्तावक भी बनाया गया था.
‘लाल बिल्डिंग’ का भी जिक्र
सपा अध्यक्ष ने लखनऊ की ‘लाल बिल्डिंग’ को लेकर भी भ्रष्टाचार के आरोपों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पहले से यह चर्चा होती रही है कि पार्किंग से मिलने वाली रकम इमारत की लागत से भी अधिक हो जाएगी.
अखिलेश यादव ने संबंधित अधिकारियों पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि उनकी पहले गोरखपुर में तैनाती रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि वे वहां की कथित अनियमित कार्यशैली को लखनऊ तक लेकर आए और तंज कसते हुए इसे ‘गोरखधंधा’ बताया.



