चंडीगढ़. पंजाब यूनिवर्सिटी में सीनेट चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज़ होता जा रहा है। आज यूनिवर्सिटी के सभी गेट पूरी तरह सील कर दिए गए हैं और छात्रों को परिसर में प्रवेश नहीं दिया जा रहा। गेटों के बाहर सैकड़ों छात्र जमा है और अंदर जाने की मांग कर रहे हैं। हर गेट पर भारी पुलिस बल तैनात है, जिससे छात्रों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ता नज़र आ रहा है।
छात्र अपने आई-कार्ड दिखाते हुए चिल्ला रहे है, “यह हमारी यूनिवर्सिटी है, हमें अंदर जाने दो!” पुलिस के साथ बहस और धक्का-मुक्की के दृश्य भी देखे गए। दूसरी ओर, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आज और कल (10-11 नवंबर) छुट्टी का ऐलान कर दिया हैं।
बीती रात भारी हंगामा, पुलिस गो बैक के नारे
बीती रात यूनिवर्सिटी में ज़ोरदार हंगामा हुआ। केंद्र सरकार द्वारा सीनेट और सिंडिकेट भंग करने का फैसला वापस लेने के बावजूद छात्रों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। भारी संख्या में चंडीगढ़ पुलिस के जवान तैनात किए गए, जिसके बाद छात्रों ने “चंडीगढ़ पुलिस गो बैक” और “केंद्र सरकार मुर्दाबाद” के नारे लगाते हुए प्रदर्शन और तेज कर दिया।

छात्रों की मुख्य मांग है कि 91 सीटों वाले सीनेट चुनाव की तारीख तुरंत घोषित की जाए, ताकि भंग करने के फैसले को वापस लेने वाली अधिसूचना पर पूरी तरह भरोसा किया जा सके।
क्या है पूरा मामला?
28 अक्टूबर को केंद्र सरकार ने 59 साल पुरानी सीनेट और सिंडिकेट को भंग करने का नोटिफिकेशन जारी किया था। इसके तुरंत बाद पंजाब में राजनीतिक बवाल मच गया। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, शिरोमणि अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर बादल और कांग्रेस नेता परगट सिंह ने इसे “पंजाब और पंजाबियत को खत्म करने की साजिश” बताया।
छात्र एकजुट हो गए और लगातार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस आंदोलन को किसान नेताओं, पंजाबी कलाकारों और कई राजनीतिक दलों का खुला समर्थन मिला। दबाव बढ़ने पर केंद्र सरकार ने भंग करने का फैसला वापस ले लिया, लेकिन छात्रों का कहना है कि जब तक चुनाव की तारीख घोषित नहीं होती, वे पीछे नहीं हटेंगे।
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