अनिल शर्मा. मोहड़ा ब्लॉक के दुराना गांव में मानवता को प्रेरित करने वाली एक अनुकरणीय तस्वीर सामने आई है। गांव की 66 वर्षीय अमरो देवी इन्सां का शुक्रवार सुबह अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण निधन हो गया। रूढ़िवादी परंपराओं को पीछे छोड़ते हुए, उनके परिजनों ने मृत देह को चिकित्सा अनुसंधान के लिए सौंप दिया। इस विदाई की खास बात यह रही कि बेटियों और बहू ने खुद आगे बढ़कर शव को कंधा दिया, जो सामाजिक बदलाव का एक बड़ा संदेश है।

अमरो देवी के बेटों, राकेश और बलवान इन्सां ने बताया कि उनकी माता डेरा सच्चा सौदा की सामाजिक और परोपकारी शिक्षाओं से जुड़ी थीं। उन्होंने वर्ष 1995 में आध्यात्मिक दीक्षा ली थी और अपने जीवनकाल में ही शपथ पत्र भरकर मृत्यु उपरांत देहदान का संकल्प ले लिया था। मातृ-शोक के इस कठिन समय में भी परिवार ने उनके अंतिम संकल्प को पूरा करने में देर नहीं की। विदाई के समय बेटी रेणु बाला, संगीता इन्सां और बहू सीमा इन्सां ने समाज की बंदिशों को दरकिनार कर अर्थी को कंधा दिया।

प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर इस कदम की काफी सराहना हो रही है। डेरा सच्चा सौदा के ब्लॉक जिम्मेदार भाग सिंह इन्सां ने बताया कि मृत देह को रोहतक स्थित गौड़ ब्राह्मण आयुर्वेदिक कॉलेज को सुपुर्द किया गया है। यह निर्णय चिकित्सा क्षेत्र के छात्रों के व्यावहारिक शोध और अध्ययन में बेहद मददगार साबित होगा। ग्रामीण परिवेश में इस तरह का फैसला अंधविश्वास पर वैज्ञानिक चेतना की जीत की तरह देखा जा रहा है, जो भविष्य में अंगदान और देहदान के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने का काम करेगा।
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