कुंदन कुमार, पटना। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और बिहार सरकार के मंत्री संतोष सुमन के बयानों पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मांझी दलित समाज का वर्गीकरण करके उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करने की गहरी साजिश रच रहे हैं।

​दलितों के अधिकारों की अनदेखी का आरोप

सांसद अरुण भारती ने कहा कि जीतन राम मांझी जब राज्य के मुख्यमंत्री और केंद्र में एससी-एसटी कल्याण मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर थे, तब वह अपने समाज यानी मुसहर और भुईयां जाति के लोगों को उनका हक नहीं दिला सके। उनके कार्यकाल के दौरान ही दलित समाज का वर्गीकरण हुआ, जिसे रोकने में वह पूरी तरह असफल रहे। भारती ने कहा कि मांझी और उनके पुत्र केवल बयानबाजी कर रहे हैं और मुसहर-भुईयां समाज के अधिकारों की अनदेखी कर राजनीति आगे बढ़ा रहे हैं।

​सवर्ण आरक्षण और रामविलास पासवान का योगदान

सवर्ण आरक्षण के मुद्दे पर बात करते हुए अरुण भारती ने कहा कि पार्टी संस्थापक स्वर्गीय रामविलास पासवान ने हमेशा सर्वसमाज के उत्थान और अधिकारों के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। वर्ष 2019 में उन्होंने ही सबसे पहले देश में सवर्ण गरीबों को आरक्षण दिए जाने की वकालत की थी। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि जीतन राम मांझी और संतोष सुमन ने कभी इस दिशा में कोई ठोस लड़ाई नहीं लड़ी और अब वे क्रीमी लेयर जैसे मुद्दों की आड़ में असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।

​हमारी पार्टी समावेशी राजनीति की पक्षधर

अपनी पार्टी की नीतियों का बचाव करते हुए अरुण भारती ने कहा कि एलजेपी (रामविलास) ने हमेशा सभी जातियों और वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व दिया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पार्टी ने संजय पासवान जैसे दलित चेहरे को मंत्री पद से नवाजा और कई दलित उम्मीदवारों को पार्टी के टिकट पर चुनाव जितवाकर सदन में भेजा। उन्होंने अंत में सवाल किया कि जीतन राम मांझी और उनकी पार्टी ने अब तक कितने दलितों को टिकट दिया और कितने दलित नेता उनकी पार्टी से चुनाव जीतकर विधानसभा या संसद पहुंचे हैं।