आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार और मेटा (Meta) से जुड़े हालिया विवाद के बीच केंद्र सरकार ऐसे कानून बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिनका उद्देश्य प्रधानमंत्री को भारतीय नागरिकों की कानूनी कार्रवाई से बचाना है। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा प्रस्तावित कानूनी प्रावधान लोकतांत्रिक जवाबदेही और नागरिकों के अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार और उसके शीर्ष पदों पर बैठे लोगों को कानून के दायरे में रहकर जवाबदेह होना चाहिए।

केजरीवाल ने दावा किया कि प्रधानमंत्री अब अपने ही नागरिकों के खिलाफ खड़े दिखाई दे रहे हैं और सरकार की नीतियों को लेकर लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट में केजरीवाल ने लिखा, “भारत के प्रधानमंत्री अब अपने ही नागरिकों से लड़ रहे हैं। वे भारत के नागरिकों से खुद को बचाने के लिए कानून बना रहे हैं। पेपर लीक और E20 जैसे मुद्दों का असर यह हुआ है कि उनके पुराने समर्थक भी तेजी से उनके खिलाफ हो रहे हैं।”

AAP प्रमुख ने दावा किया कि विभिन्न विवादों और नीतिगत फैसलों के कारण सरकार को जनता के बीच बढ़ती नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने विशेष रूप से पेपर लीक और E20 ईंधन नीति जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मामलों ने सरकार की छवि को प्रभावित किया है और उसके पारंपरिक समर्थक वर्ग में भी असंतोष पैदा किया है।

मेटा विवाद पर बढ़ा सियासी घमासान

सूत्रों के अनुसार, मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क जुकरबर्ग ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मटीरियल, डीपफेक कंटेंट और प्लेटफॉर्म के संचालन में हुई कुछ गंभीर चूकों को लेकर भारत सरकार से माफी मांगी है। सूत्रों ने बताया कि हाल ही में सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट के बाद मेटा की जांच शुरू हुई थी। रिपोर्ट में बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े कथित विज्ञापनों के प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने का मुद्दा उठाया गया था। इस मामले में सरकार द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में कंपनी ने स्वीकार किया कि कुछ गैर-कानूनी और आपत्तिजनक कंटेंट को प्लेटफॉर्म पर प्रमोट किया गया था। जानकारी के मुताबिक, मेटा ने यह भी माना है कि ऐसे कंटेंट को विशेष ऑडियंस तक पहुंचाने के लिए पेड प्रमोशन का इस्तेमाल किया गया था। यह स्वीकारोक्ति जांच के दौरान सामने आई, जिसके बाद मामले को और गंभीरता से लिया जा रहा है।

सरकार-मेटा बैठक में उठे गंभीर सवाल, ‘सेफ हार्बर’ नियम पर भी हुई चर्चा

मेटा (Meta) और भारत सरकार के बीच हुई हालिया बैठक में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट, डीपफेक सामग्री और प्लेटफॉर्म संचालन से संबंधित गंभीर मुद्दों पर चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क जुकरबर्ग ने इन मामलों में हुई चूकों के लिए माफी व्यक्त की है।  सरकार ने मेटा को स्पष्ट रूप से बताया कि कंपनी केवल एक निष्क्रिय ‘इंटरमीडियरी’ (मध्यस्थ) की तरह कार्य नहीं करती, क्योंकि उसके एल्गोरिदम और प्रणालियां यह तय करती हैं कि कौन-सा कंटेंट किस उपयोगकर्ता तक पहुंचेगा। इसी आधार पर सरकार की ओर से यह रुख सामने रखा गया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मिलने वाला ‘सेफ हार्बर’ संरक्षण स्वतः लागू नहीं माना जा सकता, क्योंकि प्लेटफॉर्म कंटेंट के वितरण और प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाता है।

सूत्रों के अनुसार, बुधवार को मेटा के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कपलान के नेतृत्व में कंपनी के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन से मुलाकात की। करीब 45 मिनट तक चली इस बैठक में विभिन्न नियामकीय और कंटेंट मॉडरेशन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक के दौरान मेटा के अधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संबंधित एक फेसबुक वीडियो को अस्थायी रूप से हटाए जाने की घटना पर भी स्पष्टीकरण दिया। कंपनी ने इसे एक तकनीकी या संचालन संबंधी त्रुटि बताते हुए सरकार को पूरी जानकारी उपलब्ध कराई। मेटा (Meta) और भारत सरकार के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक ऐसे समय में सामने आई है, जब संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने फेसबुक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो हटाए जाने के मामले को लेकर कड़ा रुख अपनाया है।

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