Asaduddin Owaisi Reac on Shiv Sena Split: पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के बाद अब महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना भी टूट गई है। उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद शिंदे गुट को समर्थन देने का ऐलान किया है। बकायदा इसके लिए उद्धव ठाकरे के सभी बागी सांसद शिंदे गुट में मर्जर के लिए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र दे चुके हैं। उद्धव ठाकरे की शिवसेना टूटने पर असदुद्दीन ओवैसी ने तंज कसा है। AIMIM प्रमुख ने कहा कि शिकारी नया है, जाल पुराना है।
हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा- UBT के कुछ MP भी BJP में जाने की सोच रहे हैं। शायद हमें उन दो खास MP से पूछना चाहिए कि इन MP को BJP में जाने की ‘धमकी’ किसने दी? बाकी 19 TMC MP क्यों गए? शायद किसी पर इल्ज़ाम लगाने में एक महीना लग जाए। जैसा कि कुरान में कहा गया है, “हर चुगलखोर, बदनाम करने वाले पर लानत है।
उन्होंने आगे लिखा कि- बड़े पैमाने पर BJP में जाना इतना आसान क्यों है? ये सब लोग क्यों भाग रहे हैं? आप अपनी सभी नाकामियों के लिए एक ‘खास MP’ को इल्ज़ाम नहीं दे सकते। शिकारी नया है, जल पुराना है…
उद्धव के 6 सांसदों ने बनाया अलग गुट
बता दें कि 17 जून को महाराष्ट्र की राजनीतिक में बड़ा उलटफेर देखने को मिला। उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 6 सांसदों ने अलग गुट बना लिया। सूत्रों के मुताबिक शिंदे गुट की शिवसेना में विलय के लिए छह सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को चिट्ठी भी भेज दिया है। चिट्ठी भेजने वाले सांसदों में नागेश पाटिल आष्टीकर और संजय दीना पाटिल का नाम शामिल है। संजय दीना पाटिल ने पार्टी छोड़ने की अटकलों को खारिज किया था। उन्होंने कहा- मैं उद्धव ठाकरे की पार्टी का सांसद हूं और इसी पार्टी में रहूंगा। 6 सांसदों के बागी होने के बाद उद्धव ठाकरे की पार्टी में अब सिर्फ 3 लोकसभा सांसद बच गए हैं।
उद्धव के ये 6 सांसद बागी
- संजय जाधव
- संजय देशमुख
- नागेश पाटिल अष्टिकर
- ओमराजे निंबालकर
- भाऊसाहेब वाकचौरे
- संजय दीना पाटिल
चार साल पहले भी टूटी थी शिवसेना
बता दें कि ठीक आज से चार साल पहले 20 जून 2022 को महाराष्ट्र में शिवसेना के 55 में से 40 विधायक एकनाथ शिंदे के साथ गए थे। तब उद्धव सीएम थे। राज्यपाल ने उन्हें फ्लोर टेस्ट को कहा। उद्धव सुप्रीम कोर्ट गए, लेकिन कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट नहीं रोका तो उद्धव ने इस्तीफा दे दिया।30 जून 2022 को भाजपा के समर्थन से एकनाथ शिंदे सीएम बने थे। इसके बाद दोनों गुट एक-दूसरे के विधायकों को अयोग्य ठहराने सुप्रीम कोर्ट गए। कोर्ट ने फैसला स्पीकर राहुल नार्वेकर पर छोड़ दिया। 10 जनवरी 2023 को स्पीकर ने कहा कि जब बगावत हुई, तब शिंदे गुट में 37 विधायक थे। इसलिए यही असली शिवसेना है। शिंदे गुट के विधायकों की सदस्यता भी रद्द नहीं की।
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