Dharm Desk – ज्योतिष शास्त्र में राहु को एक ऐसा ग्रह माना गया है, जिसका स्वभाव हमेशा लीक से हटकर चलने का होता है. यही वजह है कि जब विवाह भाव का संबंध राहु से बनता है तो यह परंपरागत तरीकों से अलग हटकर विवाह करवाता है. ऐसे में व्यक्ति अपने परिवार की सोच और रीति-रिवाजों से अलग जाकर जीवनसाथी चुन सकता है. राहु को रहस्य और भ्रम का कारक ग्रह कहा जाता है. यह ऐसे संबंधों को जन्म देता है, जो झूठ जैसे लगते हुए भी सच का एहसास कराते हैं. ऐसे में यदि कोई प्रेम विवाह की इच्छा रखता है, तो ज्योतिष में राहु को प्रसन्न करने की बात कही गई है. क्योंकि यही ग्रह परंपराओं को तोड़कर नए रिश्तों की राह बनाता है.

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यदि कुंडली के पहले या 7वें भाव में राहु स्थित हो, तो जातक का विवाह आमतौर पर घरवालों की पसंद से अलग होता है. ऐसे लोग अक्सर ऐसे जीवनसाथी की ओर आकर्षित होते हैं, जिन्हें शुरुआत में परिवार की मंजूरी नहीं मिलती. हालांकि, यदि राहु के साथ गुरु ग्रह का प्रभाव जुड़ जाए. तो समय के साथ परिवार इस रिश्ते को स्वीकार कर लेता है. लेकिन किसी शुभ ग्रह का सहयोग न मिलने पर दांपत्य जीवन में संघर्ष की स्थिति बन सकती है.

प्रेम संबंधों के मामले में भी राहु की भूमिका अहम

आमतौर पर शुक्र और पंचम भाव को प्रेम का कारक माना जाता है. लेकिन राहु भी ऐसे रिश्तों को पनपने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. खासकर वे प्रेम संबंध जो समाज की नजरों से छिपकर आगे बढ़ते हैं, राहु के प्रभाव में ही विकसित होते है.

राहु को खुश कैसे करे?

  • भगवान शिव और काल भैरव की पूजा.
  • राहु बीज मंत्र ओम रां राहवे नमः का जाप.
  • गोमेद रत्न धारण करना.
  • शनिवार को गरीबों को भोजन कराना और काले तिल, कंबल, तेल आदि दान करना.
  • मछली को जीवनदान देना.