Automobile Desk – दोपहिया वाहन चलाते समय सड़क पर आपका सीधा संपर्क केवल Bike के टायरों से होता है। अक्सर लोग नया टायर खरीदते समय सिर्फ उसकी कीमत या लुक्स देखकर फैसला कर लेते हैं, जो सुरक्षा के लिहाज से काफी जोखिम भरा हो सकता है। बाइक का सही संतुलन, अचानक ब्रेक लगाने पर कंट्रोल और बेहतर माइलेज पूरी तरह से टायरों की स्थिति पर निर्भर करता है। इसलिए नया टायर चुनने से पहले कुछ बुनियादी और बेहद जरूरी बातों को समझना आवश्यक है।

सब्सक्राइबर्स और बाइक राइडर्स को सबसे पहले इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि पुराना टायर बदलने का सही समय कब है। टायरों की ग्रिप यानी उनके ऊपर बने खांचे (ट्रेड्स) जब घिसकर समतल होने लगें, तो समझ जाएं कि उनकी उम्र पूरी हो चुकी है। इसके अलावा टायरों की साइडवॉल पर नजर रखना भी उतना ही जरूरी है। अगर रबड़ में कहीं बारीक दरारें, कट या कोई उभार (बल्ज) दिखाई दे, तो ऐसे टायरों के साथ तेज रफ्तार में गाड़ी चलाना खतरनाक हो सकता है। खराब टायर अचानक पंचर होने या फटने की संभावना को बढ़ा देते हैं।

कंपनी की सिफारिश और सही साइज का चुनाव सबसे मुख्य बिंदु है। कई बार लोग बाइक को स्पोर्टी लुक देने के लिए चौड़े या अलग साइज के टायर लगवा लेते हैं। ऐसा करने से Bike का ओरिजिनल बैलेंस बिगड़ जाता है। इसका सीधा असर सस्पेंशन, हैंडलिंग और पेट्रोल की खपत पर पड़ता है। टायर की साइडवॉल पर कुछ नंबर और कोड लिखे होते हैं, जो उसके सटीक माप को दर्शाते हैं। नया टायर खरीदते समय हमेशा इन्हीं नंबरों के हिसाब से खरीदारी करें।

आपकी बाइक के व्हील का प्रकार भी टायर के चयन को प्रभावित करता है। आमतौर पर अलॉय व्हील के साथ ट्यूबलेस टायर का कॉम्बिनेशन सबसे व्यावहारिक माना जाता है। ट्यूबलेस टायर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि कील या कोई नुकीली चीज चुभने पर हवा एक झटके में बाहर नहीं निकलती, जिससे राइडर को बाइक संभालने और सुरक्षित जगह तक पहुंचने का पर्याप्त समय मिल जाता है। स्पोक व्हील वाली Bike में ट्यूब वाले टायरों का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से होता आया है। राइडिंग स्टाइल और रास्तों के हिसाब से टायर का चुनाव करना समझदारी है।

डेली सिटी राइडिंग

अगर आपकी आवाजाही शहर की पक्की सड़कों पर रहती है, तो सामान्य स्ट्रीट टायरों का चयन करें, जो सूखी और गीली दोनों सतहों पर बेहतर ग्रिप प्रदान करते हैं।

हाईवे और लंबी दूरी

अगर आप अक्सर लंबी दूरी तय करते हैं या तेज रफ्तार में सफर करते हैं, तो रेडियल टायरों का विकल्प बेहतर होता है। इनकी बनावट मोड़ (कॉर्नरिंग) पर Bike को स्थिर रखती है।

ऑफ-रोडिंग और कच्चे रास्ते

मिट्टी, बजरी या पथरीले रास्तों के लिए ‘नॉबी’ या ब्लॉक-पैटर्न वाले टायरों की जरूरत होती है। इनके गहरे खांचे ढीली मिट्टी में भी मजबूत पकड़ बनाए रखते हैं। टायर के पैटर्न का बारिश के मौसम में भी बड़ा रोल होता है। सही खांचों वाला डिज़ाइन सड़क पर जमा पानी को बाहर की तरफ धकेलता है, जिससे टायर और सड़क का संपर्क बना रहता है और गाड़ी फिसलने से बचती है। कीमत के बजाय अपनी जरूरत और सुरक्षा मानकों को प्राथमिकता देकर ही नया टायर लगवाएं।