मयंक श्रीवास्तव, अयोध्या. श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के बाद अब धर्मनगरी अयोध्या से काशी और मथुरा के धार्मिक स्थलों की मुक्ति की मांग तेज हो गई है. विश्व हिंदू महासंघ के तत्वावधान में गोरक्षपीठ के पूर्व महंत अवैद्यनाथ की पुण्यतिथि के अवसर पर अयोध्या में एक विशाल शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें संतों और सनातन समर्थकों का भारी सैलाब देखने को मिला.
यह भव्य शोभायात्रा अयोध्या के गांधी पार्क से शुरू होकर सिविल लाइन तक पहुंची. यात्रा में बड़ी संख्या में साधु-संत, धर्माचार्य और संगठन के कार्यकर्ता शामिल हुए. पूरे मार्ग में ‘अयोध्या तो बस झांकी है, काशी-मथुरा बाकी है’ और ‘अयोध्या के बाद अब काशी-मथुरा की बारी’ जैसे गगनभेदी नारों के साथ वातावरण पूरी तरह धर्ममय हो गया.
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शोभायात्रा के दौरान संतों ने खुले मंच से काशी विश्वनाथ परिसर में नंदी के इंतजार और मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े स्थलों की मुक्ति का संकल्प दोहराया. संतों ने स्पष्ट किया कि अयोध्या में प्रभु श्रीराम के अपने भव्य धाम में विराजमान होने के बाद अब सनातन समाज का अगला पड़ाव काशी और मथुरा ही है.
धार्मिक प्रतीकों और संकल्प के साथ बढ़ा आंदोलन
आयोजकों और वरिष्ठ संतों ने कहा कि महंत अवैद्यनाथ का पूरा जीवन श्रीराम जन्मभूमि और सनातन चेतना के जागरण के लिए समर्पित रहा. उनकी पुण्यतिथि पर अयोध्या की धरती से लिया गया यह संकल्प काशी और मथुरा के धार्मिक स्थलों की पूर्ण मुक्ति तक जारी रहेगा. शोभायात्रा में शामिल धार्मिक प्रतीकों और झांकियों ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर एक नया राजनीतिक और धार्मिक मोड़ दे दिया है.
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इस धार्मिक यात्रा की अगुवाई विश्व हिंदू महासंघ जिला अध्यक्ष उमेश प्रताप सिंह द्वारा की गईं.उन्होंने कहा कि राष्ट्रसंत परमपूज्य महंत अवैद्यनाथ जी महाराज की पुण्यतिथि के अवसर पर हिंदू संगठनों द्वारा 75 जिलों में कृष्ण जन्मभूमि आंदोलन को गति देने के लिए व्यापक शोभा यात्रा का आयोजन किया गया. बताया कि जिस प्रकार राष्ट्रसंत महंत अवैद्यनाथ जी के नेतृत्व में श्री राम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन की नींव रखी गई और अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण साकार हुआ, उसी तर्ज पर अब मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति का संकल्प लिया गया है.



