अनिल शर्मा, बराड़ा: लघु सचिवालय बराड़ा में सोमवार को उपमण्डल स्तरीय सतर्कता समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता एसडीएम सतीन्द्र सिवाच ने की। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने विकास कार्यों और योजनाओं की लंबी-चौड़ी रिपोर्टें पेश कीं, लेकिन क्षेत्र की बदहाल व्यवस्थाओं और अधूरे कार्यों पर कोई ठोस जवाब सामने नहीं आया।
बैठक में सिंचाई विभाग, बिजली निगम, पीडब्ल्यूडी, कृषि विपणन बोर्ड, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, पंचायत राज विभाग और नगरपालिका के अधिकारी मौजूद रहे। एसडीएम ने अधिकारियों को सरकार की योजनाओं का लाभ समय पर जनता तक पहुंचाने और विकास कार्यों में लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए। हालांकि सवाल यह है कि ऐसे निर्देश हर बैठक में दिए जाते हैं, फिर भी क्षेत्र में पेयजल संकट, खराब सड़कें, बिजली कटौती और अधूरे निर्माण कार्यों की शिकायतें लगातार क्यों बनी हुई हैं?
बैठक में लंबित मामलों की समीक्षा कर अधिकारियों को जल्द समाधान के आदेश दिए गए, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि अब तक देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हुई। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में चल रहे कई विकास कार्य महीनों से धीमी गति का शिकार हैं, जिससे आमजन परेशान हैं।

एसडीएम सतीन्द्र सिवाच ने पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन की बात कही, लेकिन बैठक में जनता की शिकायतों और जमीनी हकीकत पर खुली चर्चा न होना कई सवाल खड़े कर गया। लोगों का कहना है कि अगर केवल बैठकों और निर्देशों से विकास होता, तो बराड़ा की मूलभूत समस्याएं कब की खत्म हो चुकी होतीं।
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