Bastar News Update : बस्तर. बोधघाट परियोजना बस्तर की सबसे लंबी अधूरी योजनाओं में शामिल हो चुकी है। करीब 45 साल बाद भी यह परियोजना जमीन पर उतर नहीं सकी है। 1979 में केंद्र सरकार ने इस परियोजना को मंजूरी दी थी। लेकिन विरोध और जनआंदोलन के कारण काम लगातार अटकता रहा। पहले इसे सिंचाई परियोजना के रूप में आगे बढ़ाने की कोशिश हुई थी। ग्रामीणों और राजनीतिक दलों के विरोध के बाद योजना फिर ठंडे बस्ते में चली गई। अब राज्य सरकार दोबारा इसे शुरू करने की तैयारी कर रही है। दूसरी ओर प्रभावित क्षेत्र के लोग फिर विरोध में उतरते नजर आ रहे हैं। बस्तर में सिंचाई सुविधाओं की कमी को लेकर किसान लंबे समय से परेशान हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि परियोजना पूरी होने से खेती और जल उपयोग में बड़ा बदलाव आ सकता है। इधर आंध्र प्रदेश की पोलावरम परियोजना लगभग पूरी होने के करीब पहुंच चुकी है। ऐसे में बोधघाट को लेकर बस्तर में फिर नई बहस शुरू हो गई है।
ई-केवाईसी की सुस्ती से अटकी हजारों महिलाओं की उम्मीद
बस्तर. महतारी वंदन योजना का लाभ जारी रखने के लिए जरूरी ई-केवाईसी प्रक्रिया बस्तर जिले में बेहद धीमी रफ्तार से चल रही है। 30 जून की अंतिम तारीख करीब है, लेकिन अब भी 47 हजार से ज्यादा महिलाओं का सत्यापन अधूरा है। जिले में सबसे खराब स्थिति जगदलपुर ब्लॉक की बताई जा रही है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्र मिलाकर यहां करीब 12 हजार मामले लंबित पड़े हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग की चिंता अब लगातार बढ़ती जा रही है। सर्वर की सुस्ती और कई केंद्रों की लॉग-इन आईडी लॉक होना बड़ी वजह माना जा रहा है। करीब 2 हजार बुजुर्ग महिलाओं के फिंगरप्रिंट और आइरिस स्कैन मैच नहीं हो पा रहे हैं। उम्र और मेहनत-मजदूरी के कारण बायोमेट्रिक पहचान में दिक्कत आ रही है। हालांकि विभाग ने सीएससी और वीएलओ के जरिए वैकल्पिक समाधान शुरू करने का दावा किया है। कांकेर और कोंडागांव के मुकाबले अब बस्तर जिला पिछड़ता नजर आ रहा है। यदि तय समय तक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई तो हजारों महिलाओं का योजना लाभ रुक सकता है। प्रशासन अब अंतिम दिनों में तेजी लाने की तैयारी में जुटा हुआ है।
सड़क नहीं, नावों के सहारे नदी पार कर रहा तेंदूपत्ता
बीजापुर. बीजापुर के माड़ इलाके में आज भी विकास की सबसे बड़ी कमी सड़क बनकर सामने आ रही है। जारेमरका फड़ में तेंदूपत्ता संग्रहण तेज है, लेकिन परिवहन अब भी चुनौती बना हुआ है। इंद्रावती नदी पार कराने के लिए ग्रामीणों ने नावों को बांधकर “कट्टू” तैयार किया है। इसी अस्थायी प्लेटफॉर्म पर तेंदूपत्ता की बोरियां लादकर नदी पार कराई जा रही हैं। नदी के दूसरी ओर फिर वाहनों के जरिए सामग्री संग्रहण केंद्र तक पहुंचती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल यही जुगाड़ करना मजबूरी बन जाती है। बरसात और तेज बहाव के दौरान हादसे का खतरा भी बना रहता है। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क नहीं होने से समय और मेहनत दोनों ज्यादा लगती है। हालांकि नाविकों को इस व्यवस्था से रोजगार जरूर मिल रहा है। वन विभाग भी फिलहाल इसी वैकल्पिक व्यवस्था के भरोसे काम चला रहा है। माड़ क्षेत्र के कई गांव अब भी सड़क सुविधा से पूरी तरह कटे हुए हैं।ग्रामीणों ने सरकार से स्थायी सड़क संपर्क की मांग तेज कर दी है।
Bastar News Update : रेत के टीलों में सिमटती जा रही इंद्रावती की धार
बस्तर. बस्तर की जीवनरेखा कही जाने वाली इंद्रावती नदी अब सरकारी उपेक्षा की कहानी बनती जा रही है। नदी के बीच बने रेत के बड़े-बड़े टीले अब इसके प्राकृतिक प्रवाह को रोक रहे हैं। बताया जा रहा है कि जोरा नाला से चित्रकोट तक 50 से ज्यादा स्थानों पर रेत जम चुकी है। कई जगहों पर इन टीलों में वनस्पतियां तक उग आई हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वर्षों से रेत हटाने की मांग की जा रही है। इंद्रावती विकास प्राधिकरण बनने के बाद भी जमीनी स्तर पर कोई बड़ा काम नहीं हुआ। प्रबुद्ध नागरिकों ने इसे पूरे बस्तर के साथ अन्याय बताया है। इंद्रावती नदी से ही चित्रकोट जलप्रपात और बारसूर जैसे ऐतिहासिक क्षेत्र जुड़े हुए हैं। जल बंटवारे के विवाद और बांध निर्माण के बाद नदी की स्थिति और खराब हुई है। विशेषज्ञों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि नदी भविष्य में अपना प्रवाह बदल सकती है। इसके बावजूद संरक्षण और गहरी सफाई को लेकर गंभीर प्रयास नहीं दिख रहे हैं। बस्तरवासियों का कहना है कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो संकट और गहरा सकता है।
Bastar News Update : 9 साल बाद खुली फर्जीवाड़े की फाइल
सुकमा. कोंटा नगर पंचायत में वर्षों पुराना कथित पदोन्नति घोटाला अब उजागर हो गया है। तत्कालीन अधिकारी नत्थूराम सोरी को कैशियर से सीधे सहायक ग्रेड-02 बना दिया गया था। जांच में यह पूरी प्रक्रिया नियम विरुद्ध पाई गई है। जिला पंचायत की रिपोर्ट के बाद नगरीय प्रशासन विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। संयुक्त संचालक ने पदोन्नति निरस्त कर मूल पद पर वापस भेजने के निर्देश दिए हैं। बताया गया कि नियमों के मुताबिक सहायक ग्रेड-03 से ही अगली पदोन्नति संभव थी। कैशियर पद से सीधे एंट्री का कोई प्रावधान ही मौजूद नहीं था। मामले का खुलासा सूचना के अधिकार के जरिए सामने आया। जांच के दौरान कई अहम दस्तावेज और मूल सेवा पुस्तिका तक गायब मिली। रिपोर्ट में पदोन्नति के आधार को पूरी तरह अस्पष्ट बताया गया है। अब इस मामले में तत्कालीन चयन समिति के अधिकारियों पर भी सवाल उठ रहे हैं। कार्रवाई के बाद नगर पंचायत में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।
Bastar News Update : पकड़ी गई लाखों की अवैध शराब
बस्तर. आबकारी विभाग ने अवैध शराब कारोबार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन तस्करों को गिरफ्तार किया है। झारतरई बाजार में विदेशी शराब खपाने की तैयारी चल रही थी। मुखबिर की सूचना पर विशेष टीम ने घेराबंदी कर पूरी खेप पकड़ ली। मौके से करीब 387 बल्क लीटर शराब जब्त की गई है। बरामद शराब की कीमत लगभग 2 लाख 90 हजार रुपये बताई जा रही है। गोवा व्हिस्की के 40 कार्टन में करीब l 2000 पाव शराब भरी हुई थी। आरोपी ग्राहकों का इंतजार कर रहे थे तभी टीम ने दबिश दी। तस्करी में इस्तेमाल दो मोटरसाइकिलें भी जब्त की गई हैं। तीनों आरोपियों के खिलाफ आबकारी एक्ट की गैर-जमानती धाराओं में मामला दर्ज हुआ है। कार्रवाई में आबकारी विभाग की विशेष टीम की अहम भूमिका रही। विभाग का दावा है कि इससे इलाके के अवैध शराब नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। अधिकारियों ने आगे भी अभियान जारी रखने की बात कही है।
अधूरी पुलिया और जर्जर हाईवे ने बढ़ाया जान का खतरा
सुकमा. सुकमा-जगदलपुर नेशनल हाईवे अब सफर कम और जोखिम ज्यादा बनता जा रहा है। तोंगपाल और दरभा के बीच बन रही पुलिया महीनों से अधूरी पड़ी है। 20 दिन में पूरा होने वाला काम तीन महीने बाद भी खत्म नहीं हो सका। ठेकेदार ने सिर्फ ढांचा खड़ा कर निर्माण लगभग बंद कर दिया है। इस बीच सड़क पर बने गड्ढे और कच्चे डायवर्सन हादसों का कारण बन रहे हैं। गुरुवार रात एक ट्रक खराब होने से साढ़े तीन घंटे तक जाम लगा रहा। बसें, ट्रक और एंबुलेंस तक हाईवे पर फंसी रहीं। उमस भरी रात में महिलाएं और बच्चे परेशान नजर आए। पुलिस को मौके पर पहुंचकर डायवर्सन चौड़ा करवाना पड़ा। स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि नेशनल हाईवे पर पक्का डायवर्सन अब तक क्यों नहीं बना। चुनाव के दौरान यही सड़क बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनी हुई थी। अब लोग आरोप लगा रहे हैं कि सत्ता बदलने के बाद भी हालात जस के तस हैं।
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