Bastar News Update, बीजापुर: बस्तर संभाग में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत जानने शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव तीन दिवसीय दौरे पर हैं। दौरे की शुरुआत बीजापुर से हुई, जहां उन्होंने आवासीय विद्यालयों की शैक्षणिक और आवासीय व्यवस्थाओं की समीक्षा की। इसके बाद जगदलपुर पहुंचकर मंत्री ने कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय किलेपाल का औचक निरीक्षण किया। छात्राओं से सीधे संवाद कर उन्होंने पढ़ाई, भोजन, स्वास्थ्य और विद्यालय की सुविधाओं की जानकारी ली।

निरीक्षण के दौरान शिक्षकों की उपलब्धता और शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर भी फीडबैक लिया गया। विषय शिक्षकों की कमी की शिकायत पर दिसंबर में होने वाली भर्ती में प्राथमिकता से पदस्थापना का आश्वासन दिया गया। छात्राओं के लिए आधुनिक बैडमिंटन और बास्केटबॉल कोर्ट बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

मंत्री ने आवासीय विद्यालयों में पौष्टिक भोजन, स्वच्छ वातावरण और स्वास्थ्य सुविधाओं पर विशेष जोर दिया। साथ ही छात्राओं के ड्रॉपआउट को रोकने और उन्हें लगातार शिक्षा से जोड़े रखने के निर्देश दिए। तीन दिवसीय दौरे में बस्तर, बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा के विद्यालयों की फील्ड विजिट की जाएगी। यानी इस दौरे का फोकस सिर्फ समीक्षा बैठक नहीं, बल्कि स्कूलों की जमीनी कमियों को पहचानकर सुधार पर है।

आठ परिवारों के लिए बिजली अब भी सपना

बस्तर के चित्रकोट क्षेत्र में विकास के दावों के बीच बिजली की समस्या ने सवाल खड़े कर दिए हैं। चित्रकोट पंचायत के आश्रित ग्राम खरियागुड़ा पारा में आठ परिवार आज भी अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। मुख्य सड़क से लगे इस पारे में बिजली नहीं होने से ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल बनी हुई है। सबसे बड़ी परेशानी शाम ढलने के बाद शुरू होती है, जब बच्चों की पढ़ाई तक प्रभावित हो जाती है। मोबाइल चार्ज कराने के लिए ग्रामीणों को दूसरे पारे तक जाना पड़ता है। बरसात में अंधेरा और भी खतरनाक हो जाता है, क्योंकि जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा बना रहता है।

ग्रामीणों का दावा है कि कई बार शिकायत के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। पंचायत की विभिन्न समस्याओं को लेकर सरपंच की भूख हड़ताल में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था।

इसके बाद बिजली विभाग ने विद्युतीकरण के लिए स्टीमेट तैयार कर डिवीजन कार्यालय भेजा है। अब मामला स्वीकृति पर अटका है और ग्रामीणों को यह भी नहीं पता कि बिजली कब तक पहुंचेगी। आठ परिवारों का सवाल यही है कि मुख्य मार्ग से लगे पारे में बिजली पहुंचाने में आखिर इतनी देर क्यों?

10 हजार की रिश्वत ने खोली शिक्षा विभाग की पोल

सुकमा के कोंटा में शिक्षा विभाग से जुड़ी एक कार्रवाई ने भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर हलचल मचा दी। एंटी करप्शन ब्यूरो ने खंड शिक्षा अधिकारी चंद्र कुमार यारदा को कथित तौर पर 10 हजार रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। आरोप है कि एक शिक्षिका के करीब 16 लाख रुपए के लंबित एरियर्स का बिल आगे बढ़ाने के लिए रिश्वत मांगी गई थी।

शिकायतकर्ता के मुताबिक बिल पर हस्ताक्षर कराने के लिए वह करीब एक महीने से कार्यालय के चक्कर लगा रहा था।आरोप है कि बाद में एरियर्स की राशि का पांच प्रतिशत देने की मांग की गई। पूरी राशि करीब 80 हजार रुपए बैठ रही थी, जिसे एक साथ देना संभव नहीं था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने फिलहाल 10 हजार रुपए देने की बात कही।

शिकायत मिलने पर एसीबी ने पहले मामले का सत्यापन कराया और आरोप सही पाए जाने के बाद ट्रैप कार्रवाई की। रकम लेते ही टीम ने बीईओ को कथित तौर पर रंगे हाथ पकड़ लिया। कार्रवाई के बाद कार्यालय में हड़कंप मच गया और दस्तावेजों व रिकॉर्ड की जांच शुरू की गई। अब इस मामले ने सवाल खड़ा किया है कि शिक्षकों के जायज भुगतान के लिए भी अगर रिश्वत मांगी जाए तो व्यवस्था पर भरोसा कैसे कायम रहेगा।

खेल मैदान से निकलेगी नई प्रतिभा

बस्तर में खेल प्रतिभाओं को गांव से संभाग स्तर तक मंच देने के लिए बस्तर ओलंपिक 2026-27 की तैयारी शुरू हो गई है। इस आयोजन के जरिए आदिवासी अंचल के युवाओं की खेल प्रतिभा को पहचानने और निखारने पर जोर रहेगा। संभाग के सातों जिलों बस्तर, कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर, बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा में प्रतियोगिताएं होंगी।

कुल 11 खेल विधाओं में खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। इसके लिए पंजीयन की प्रक्रिया 1 से 30 अक्टूबर तक चलेगी। इसके बाद 1 से 13 नवंबर के बीच ब्लॉक स्तर पर मुकाबले आयोजित किए जाएंगे। ब्लॉक स्तर से चुने खिलाड़ी 16 से 25 नवंबर तक जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेंगे। इसके बाद 7 से 11 दिसंबर तक संभाग स्तरीय स्पर्धाओं का आयोजन होगा।

प्रशासन का फोकस सिर्फ प्रतियोगिता कराने पर नहीं बल्कि ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने पर है। खेलों के जरिए युवाओं को सकारात्मक दिशा देने और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का भी लक्ष्य रखा गया है। अब देखना होगा कि बस्तर ओलंपिक के मैदान से कितनी नई खेल प्रतिभाएं निकलकर सामने आती हैं।

बीस साल बाद भी जमीन के पट्टे का इंतजार

बीजापुर में नक्सली हिंसा से विस्थापित परिवारों का करीब दो दशक पुराना इंतजार अब आक्रोश में बदल गया है। वर्ष 2005 में हिंसा से बचकर बीजापुर पहुंचे परिवार आज भी स्थायी राजस्व पट्टे की मांग कर रहे हैं। इन परिवारों ने नगर पालिका कार्यालय का घेराव कर अपनी पीड़ा प्रशासन के सामने रखी। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक वे वार्ड 1, 7, 8, 9, 10, 11 और 12 में वर्षों से रह रहे हैं।

इसी जमीन पर उनके घर बने और बच्चों की जिंदगी भी यहीं गुजर गई। लेकिन दो दशक बाद भी उन्हें जमीन का स्थायी पट्टा नहीं मिल पाया है। परिवारों का आरोप है कि समय-समय पर उनके मकानों को अवैध कब्जा बताकर कार्रवाई के नोटिस दिए जाते हैं। ऐसे में विस्थापन झेल चुके परिवारों के सामने दोबारा उजड़ने का डर खड़ा हो गया है। प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर पट्टा देने की मांग की गई।

परिवारों ने साफ कहा कि पट्टा मिलने तक मकान तोड़ने या बेदखली की कार्रवाई रोकी जाए। अब सवाल सिर्फ जमीन के कागज का नहीं, बल्कि उन परिवारों के स्थायी पुनर्वास और भविष्य की सुरक्षा का है।

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