Bastar News Update: कोण्डागांव जिले में बीते 24 घंटों के भीतर हुए तीन अलग-अलग सड़क हादसों ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे दर्दनाक हादसा गिरोला-रांधना मार्ग पर हुआ, जहां पेड़ से टकराई बाइक में एक युवक की मौत हो गई, जबकि उसका साथी गंभीर रूप से घायल है। दोनों मजदूरी के सिलसिले में माकड़ी जा रहे थे, लेकिन रास्ता ही उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन गया।

दूसरी घटना एनएच-30 पर बनियागांव के पास हुई, जहां अज्ञात ट्रेलर की टक्कर से एक बाइक सवार की मौके पर मौत हो गई। हादसे में उसका साथी गंभीर रूप से घायल हुआ, जबकि ट्रेलर चालक वाहन समेत फरार हो गया। तीसरा मामला जैतपुरी के पास सामने आया, जहां चलती बस से हेल्पर नीचे गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। बताया गया कि ओवरटेक के दौरान बस ट्रक से टकराई और हेल्पर सड़क पर जा गिरा। घायल करीब आधे घंटे तक मदद का इंतजार करता रहा, जिसके बाद उसे अस्पताल पहुंचाया गया।

तीनों मामलों में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। फरार ट्रेलर चालक की तलाश तेज कर दी गई है। लगातार हो रहे हादसे यातायात नियमों के पालन और तेज रफ्तार पर नियंत्रण की जरूरत को फिर सामने ला रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सतर्कता और जिम्मेदार ड्राइविंग ही ऐसे हादसों को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है।

इन्द्रावती शांत, राहत भी और चिंता भी

बस्तर। इस मानसून में इन्द्रावती नदी का शांत बहाव बस्तर के लिए राहत लेकर आया है। अब तक नदी का जलस्तर चेतावनी स्तर तक भी नहीं पहुंच सका है। पिछले वर्ष जुलाई में यही नदी उफान पर थी और कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए थे। इस बार बस्तर के साथ-साथ ओड़िशा में भी अपेक्षित बारिश नहीं होने का असर साफ दिखाई दे रहा है। इन्द्रावती का उद्गम ओड़िशा में होने के कारण वहां की वर्षा सीधे नदी के जलस्तर को प्रभावित करती है। खातीगुड़ा बांध से भी इस वर्ष अतिरिक्त पानी नहीं छोड़ा गया है। इसका परिणाम यह रहा कि नदी किनारे बसे गांवों को अब तक विस्थापन जैसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा। दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा में भी पिछले साल जैसी बाढ़ नहीं आई है।

बरसाती नालों का जलस्तर भी सामान्य बना हुआ है। हालांकि मौसम विशेषज्ञ अगस्त और सितंबर को अभी भी महत्वपूर्ण मान रहे हैं। यदि इन महीनों में भारी बारिश होती है तो बाढ़ की संभावना फिर बन सकती है। फिलहाल प्रशासन और नदी किनारे रहने वाले लोग राहत की सांस जरूर ले रहे हैं, लेकिन मानसून का असली इम्तिहान अभी बाकी है।

उप जेल से जिला जेल तक, बदलेगी व्यवस्था और सुविधाएं

नारायणपुर-बीजापुर। नक्सल प्रभावित नारायणपुर और बीजापुर को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। दोनों उप जेलों को अब जिला जेल का दर्जा दे दिया गया है। इस फैसले से बंदियों की क्षमता बढ़ाने के साथ आधुनिक सुविधाओं का विस्तार होगा। स्थायी चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ और सुधारात्मक गतिविधियां स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराई जाएंगी। बंदियों के लिए शिक्षा और कौशल विकास कार्यक्रम भी मजबूत होंगे। सबसे बड़ी राहत उनके परिजनों को मिलेगी, जिन्हें अब मुलाकात के लिए दूर के जिलों तक नहीं जाना पड़ेगा। इससे समय और आर्थिक खर्च दोनों में कमी आएगी। बंदियों के बार-बार स्थानांतरण की जरूरत भी कम होगी। पुलिस एस्कॉर्ट पर दबाव घटेगा और सुरक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी। संवेदनशील इलाकों में जेल प्रबंधन को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। सरकार का उद्देश्य केवल सुरक्षा बढ़ाना नहीं बल्कि सुधार और पुनर्वास को भी गति देना है। विशेषज्ञ इसे न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।

चोरी की पिकअप बरामद, पूर्व चालक निकला आरोपी

बस्तर। संजय मार्केट पार्किंग से चोरी हुई पिकअप वाहन का पुलिस ने त्वरित खुलासा कर दिया है। करीब 12 लाख रुपये कीमत की अशोक लीलैंड पिकअप बरामद कर ली गई है। मामले में वाहन के पूर्व चालक को गिरफ्तार किया गया है। घटना के बाद पुलिस ने शहरभर के सीसीटीवी कैमरों की बारीकी से जांच की। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान की गई। पल्ली नाका के पास पुलिस ने चोरी की गाड़ी सहित आरोपी को पकड़ लिया। पूछताछ में आरोपी ने वाहन चोरी की बात स्वीकार कर ली।

पूरी कार्रवाई विशेष टीम ने योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दी। बरामद वाहन उसके असली मालिक को लौटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आरोपी को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि तकनीक और सतर्क निगरानी से वाहन चोरी के मामलों में तेजी से सफलता मिल रही है। शहरवासियों से भी वाहन पार्किंग के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की गई है।

वित्तीय अनियमितताओं पर सख्ती, 3.19 करोड़ की वसूली का आदेश

नारायणपुर जिला पंचायत ने वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। निर्माण कार्य अधूरे छोड़ने और सरकारी राशि के दुरुपयोग के आरोपों में 32 पंचायत सचिवों के खिलाफ वसूली की प्रक्रिया शुरू होगी। कुल 3 करोड़ 19 लाख 67 हजार रुपये की राशि वसूलने के निर्देश दिए गए हैं।

राजस्व अधिकारियों को 45 दिनों के भीतर आरआरसी की कार्रवाई पूरी करने को कहा गया है। वसूली की रकम संबंधित पंचायतों के खातों में जमा कराई जाएगी। जिला पंचायत हर महीने कार्रवाई की प्रगति की समीक्षा भी करेगी। विभागीय जांच में कई मामलों में वित्तीय अनियमितता सामने आई थी। आदेश में सरकारी संपत्ति को नुकसान और गबन से जुड़े नियमों का भी उल्लेख किया गया है।

सबसे अधिक राशि वाले मामलों पर प्रशासन की विशेष नजर रहेगी। इस कार्रवाई से अधूरे निर्माण कार्यों की जवाबदेही तय होने की उम्मीद बढ़ी है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि निर्धारित समय सीमा में कितनी राशि वास्तव में वसूल हो पाती है। यह फैसला पंचायत व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

कभी नक्सल गढ़, अब विकास की नई पहचान बन रहा पीड़िया

बीजापुर। एक समय नक्सली गतिविधियों के केंद्र के रूप में पहचाना जाने वाला पीड़िया गांव अब बदलाव की नई मिसाल बन रहा है। वर्षों तक प्रशासन की पहुंच से दूर रहा यह इलाका अब विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है। करीब 21 साल बाद गांव का स्कूल फिर से संचालित हो चुका है। आज यहां 84 बच्चे नियमित रूप से पढ़ाई कर रहे हैं। यह बदलाव गांव के भविष्य में लौटते।विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है। इसी क्रम में पहली बार गांव में आधार नामांकन एवं अद्यतन शिविर भी आयोजित किया गया। तकनीकी चुनौतियों के बावजूद करीब 80 ग्रामीणों का आधार पंजीयन और अपडेट सफलतापूर्वक पूरा हुआ।

अब ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आसानी होगी। सड़क संपर्क बेहतर होने के बाद प्रशासन की नियमित पहुंच संभव हो सकी है। ग्रामीणों का कहना है कि अब गांव में शिक्षा, पहचान और विकास की नई शुरुआत दिखाई दे रही है। यह परिवर्तन केवल सुविधाओं का विस्तार नहीं बल्कि भरोसे की वापसी का भी संकेत है। पीड़िया की बदलती तस्वीर बताती है कि जहां कभी हिंसा का साया था, वहां अब विकास की नई कहानी लिखी जा रही है।

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