भागलपुर। जिले में उत्पाद विभाग की टीम ने शराब तस्करों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुआल के नीचे छिपाकर ले जाई जा रही भारी मात्रा में विदेशी शराब बरामद की है। झारखंड के गोड्डा से बेगूसराय के लिए ले जाई जा रही इस अवैध शराब की खेप की कीमत बाजार में करीब 8 लाख रुपए आंकी गई है। पुलिस ने मौके से पिकअप चालक को भी गिरफ्तार कर लिया है।
वाहन जांच के दौरान सबौर थाना क्षेत्र में मिली सफलता
उत्पाद विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि झारखंड के गोड्डा से अवैध शराब की एक बड़ी खेप भागलपुर के रास्ते बेगूसराय पहुंचाई जाने वाली है। इस सूचना के आधार पर विभाग ने विशेष जांच अभियान शुरू किया। सब इंस्पेक्टर संजय कुमार के नेतृत्व में गठित टीम ने सबौर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इंजीनियरिंग कॉलेज गेज के पास सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाया। इसी दौरान सबौर की तरफ से आ रही एक संदिग्ध पिकअप गाड़ी को रोककर उसकी तलाशी ली गई।
पुआल के नीचे छिपाकर रखी गई थी 90 कार्टन शराब
पिकअप वाहन की जब गहराई से तलाशी ली गई, तो पुलिस भी हैरान रह गई। तस्करों ने पुलिस की नजरों से बचने के लिए पिकअप पर पुआल लाद रखा था और उसके ठीक नीचे अवैध विदेशी शराब के कार्टन छिपाए गए थे। जांच के दौरान कुल 90 कार्टन से ऑफिसर चॉइस ब्लू ब्रांड की विदेशी शराब बरामद हुई। बरामद की गई कुल शराब की मात्रा 803 लीटर है, जिसकी अनुमानित कीमत बाजार में 8 लाख रुपए बताई जा रही है। उत्पाद विभाग ने शराब के साथ-साथ तस्करी में इस्तेमाल किए जा रहे पिकअप वाहन को भी अपने कब्जे में ले लिया है।
रांची का रहने वाला ड्राइवर गिरफ्तार, नेटवर्क की तलाश जारी
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने पिकअप चालक को मौके से ही धर दबोचा। गिरफ्तार आरोपी की पहचान रांची (झारखंड) निवासी पीयूष पासवान के रूप में हुई है। शुरुआती पूछताछ में आरोपी ने यह स्वीकार किया कि शराब की यह खेप झारखंड के गोड्डा से लोड करके लाई गई थी। अब उत्पाद विभाग और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि बेगूसराय में यह शराब किस तस्कर या व्यक्ति को डिलीवर की जानी थी और इस अवैध कारोबार के पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
तस्करी के नए पैंतरे हो रहे नाकाम
उत्पाद विभाग के इंस्पेक्टर मनोज कुमार ने मीडिया को जानकारी दी कि यह कार्रवाई पूरी तरह से गुप्त सूचना के आधार पर की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शराब तस्कर पुलिस की पकड़ से बचने के लिए आए दिन नए-नए तरीके अपनाते रहते हैं। कभी सब्जियों, फलों या भूसे-पुआल की आड़ ली जाती है, तो कभी अन्य सामानों के बीच शराब छिपाकर ट्रांसपोर्ट की जाती है। हालांकि, उत्पाद विभाग की मुस्तैदी और सक्रियता के कारण तस्करों के नापाक मंसूबे कामयाब नहीं हो पा रहे हैं। विभाग का कहना है कि अवैध शराब के खिलाफ यह अभियान आगे भी इसी सख्ती के साथ जारी रहेगा।


