अतीश दीपंकर/भागलपुर। जिले के प्रमुख लाइफलाइन माने जाने वाले विक्रमशिला सेतु से होकर गुजरने वाले यात्रियों और वाहन चालकों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण सूचना है। जिला प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि आगामी 8 जुलाई और 9 जुलाई की रात को सेतु पर वाहनों का परिचालन पूरी तरह बंद रहेगा। यह निर्णय सेतु की संरचनात्मक मजबूती और स्थायी पुनर्स्थापन कार्य को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
सुरक्षा और निरीक्षण: क्यों बंद है रास्ता?
गंगा नदी पर स्थित विक्रमशिला सेतु पर पूर्व में बेली ब्रिज का निर्माण किया गया था। अब सेतु के स्थायी पुनर्स्थापन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए तकनीकी जांच अनिवार्य है। इसी कड़ी में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) पटना की एक उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ टीम सेतु की स्थिति का जायजा लेने के लिए भागलपुर पहुंच रही है। टीम द्वारा सेतु के विभिन्न हिस्सों का बारीकी से निरीक्षण किया जाएगा ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की बड़ी दुर्घटना को टाला जा सके और सेतु की आयु बढ़ाई जा सके।
यातायात प्रतिबंध का समय
जिला प्रशासन के निर्देशानुसार यह प्रतिबंध रात्रि के समय प्रभावी रहेगा। 8 जुलाई और 9 जुलाई को रात 10 बजे से लेकर अगले दिन सुबह 5 बजे तक सेतु पर किसी भी प्रकार के छोटे या बड़े वाहनों का प्रवेश पूर्णतः वर्जित रहेगा। इस दौरान सेतु पर केवल निरीक्षण दल और संबंधित आधिकारिक वाहनों को ही अनुमति होगी।
वैकल्पिक मार्ग और प्रशासन की अपील
प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए यातायात प्रबंधन के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे सेतु के दोनों छोरों पर बैरिकेडिंग करें और वाहनों को पूर्व निर्धारित वैकल्पिक मार्गों की ओर डाइवर्ट करना सुनिश्चित करें ताकि आम जनता को कम से कम असुविधा हो।
जिला प्रशासन ने भागलपुर के नागरिकों, ट्रक चालकों, बस ऑपरेटरों और अन्य वाहन स्वामियों से अपील की है कि वे उक्त समय सारिणी को ध्यान में रखते हुए ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं। प्रशासन ने साफ कहा है कि यह कार्य जनहित और सेतु की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। यदि किसी को अत्यंत आवश्यक कार्य से यात्रा करनी है तो वे निर्धारित समय से पूर्व या बाद में अपनी यात्रा पूरी करें।
इस महत्वपूर्ण कार्य के दौरान होने वाली असुविधा के लिए जिला प्रशासन ने खेद प्रकट किया है और आमजन से पूर्ण सहयोग की अपेक्षा की है। यह कार्य सेतु की दीर्घकालिक मजबूती और सुचारू आवागमन को बहाल रखने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

