Odisha Desk, राजनगर (केंद्रापड़ा): प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक अच्छी खबर है। केंद्रपाड़ा जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध भीतरकनिका राष्ट्रीय उद्यान तीन महीने के लंबे प्रतिबंध के बाद कल यानी 1 अगस्त से पर्यटकों के लिए फिर से खोल दिया जाएगा। इसके साथ ही देश-विदेश के पर्यटक एक बार फिर भीतरकनिका के हरे-भरे मैंग्रोव जंगलों, नदी-नालों और दुर्लभ वन्यजीवों का दीदार कर सकेंगे।
मगरमच्छों के प्रजनन काल के कारण बंद था पार्क
दुर्लभ बौला (साल्टवॉटर) मगरमच्छों के वार्षिक प्रजनन सत्र को ध्यान में रखते हुए पार्क को हर साल की तरह इस बार भी 1 मई से 31 जुलाई तक पर्यटकों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया था। प्रजनन और अंडे देने के समय मादा मगरमच्छ काफी आक्रामक और हिंसक हो जाती हैं। पर्यटकों की सुरक्षा और मगरमच्छों के शांत वातावरण में खलल न पड़े, इसलिए प्रशासन की ओर से इस अवधि में प्रवेश पर रोक लगाई जाती है।
वन विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस साल भीतरकनिका के विभिन्न नदी-नालों और मैंग्रोव क्षेत्रों में दुर्लभ बौला मगरमच्छों के कुल 117 घोंसले चिह्नित किए गए हैं।
कनिका रेंज में सर्वाधिक 106 घोंसले पाए गए, जिनमें डांगमाल (28), भीतरकनिका (36), रगड़ापाटिया (27), कालिभंजड़िया (3), उत्तरी महिंसामड़ा (5) और दक्षिणी महिंसामड़ा (7) शामिल हैं। राजनगर रेंज में कुल 10 घोंसले मिले हैं (शुणेई-रुपेई, तेंतुली क्रीक, ब्राह्मणी क्रीक, हबाल क्रीक आदि क्षेत्रों में)। महाकालपाड़ा रेंज में 1 घोंसला चिह्नित किया गया है।
कैसे होता है मगरमच्छों का प्रजनन?
मई से जुलाई तक चलने वाली इस प्रजनन प्रक्रिया के दौरान गर्भवती मादा मगरमच्छ पानी के स्तर से ऊंचे और सुरक्षित स्थान की तलाश करती है। वह सूखी पत्तियों और झाड़ियों को लगभग 2 फीट ऊंचा इकट्ठा करके घोंसला बनाती है और उसमें 40 से 60 अंडे देती है। अण्डों को पत्तियों से ढकने के बाद मादा मगरमच्छ कड़ी निगरानी रखती है। लगभग 75 दिनों के भीतर अंडों से छोटे बच्चे बाहर निकल आते हैं। अब पार्क के दोबारा खुलने से स्थानीय पर्यटन, बोट चालकों और गाइडों के चेहरे पर भी खुशी लौट आई है।
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