​आरा। भोजपुर जिले के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में न्यायिक प्रक्रिया ने गति पकड़ ली है। घटना के बाद से ही आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों की मांग पर राज्य सरकार द्वारा गठित न्यायिक जांच टीम गुरुवार को एक्शन में दिखी। रिटायर्ड जज विनोद कुमार सिन्हा ने अपनी टीम के साथ घटनास्थल और भरत के पैतृक गांव बिलौटी का दौरा किया।

​जज के सामने मां का छलका दर्द

घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद रिटायर्ड जज विनोद कुमार सिन्हा ने भरत तिवारी के माता-पिता और भाई से बंद कमरे में मुलाकात की। इस दौरान भरत की मां आशा देवी का दर्द छलक पड़ा। उन्होंने जज के सामने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह एनकाउंटर नहीं, बल्कि सोची-समझी हत्या है। मां ने दो टूक शब्दों में मांग की कि इस मामले में शामिल पुलिसकर्मियों के साथ-साथ SDM को भी फांसी की सजा मिलनी चाहिए, क्योंकि पूरा प्रशासनिक तंत्र इस घटना के लिए जिम्मेदार है।

​8 दिन बाद घर पहुंचे भोजपुर SP

इधर, मामले ने उस समय तूल पकड़ लिया जब घटना के आठवें दिन भोजपुर के एसपी राज बुधवार की रात अचानक भरत तिवारी के घर पहुंचे। घर से एसपी कार्यालय की दूरी मात्र 28 किलोमीटर है, जिसे तय करने में प्रशासन को आठ दिन लग गए। देर रात परिजनों से मुलाकात के दौरान एसपी ने चुप्पी साधे रखी और कहा कि वे यहां कोई सफाई देने नहीं, बल्कि परिवार का पक्ष सुनने आए हैं। उन्होंने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया लेकिन परिवार ने अब इस मामले की सीबीआई जांच की मांग पर जोर दिया है।

​राजनीतिक सरगर्मी तेज

उल्लेखनीय है कि 17 जून को हुए इस एनकाउंटर पर परिवार ने पुलिस के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने न्यायिक जांच के आदेश दिए थे। आज इस मामले में बीजेपी एमएलसी पवन सिंह के पीड़ित परिवार से मिलने की संभावना है जिससे इलाके में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। न्याय की आस में अब सबकी नजरें रिटायर्ड जज की रिपोर्ट पर टिकी हैं। क्या वाकई दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी या यह जांच भी फाइलों में दफन हो जाएगी यह बड़ा सवाल बना हुआ है।