संजय पाटीदार,भोपाल। बड़े तालाब के फुल टैंक लेवल (एफटीएल) और बफर जोन में अतिक्रमण हटाने को लेकर एनजीटी की सख्ती के बीच अब जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। निगम की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 16 मार्च 2022 से पहले के 53 निर्माणों को अलग श्रेणी में रखकर फिलहाल कार्रवाई से बाहर रखा गया है। ओर इसी वजह से यह करवाई से दूर है। निगम का तर्क है कि 16 मार्च 2022 से पहले के निर्माणों पर आगे की कार्रवाई का फैसला जिला प्रशासन के द्वारा गठित टास्क फोर्स समिति करेगी। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर वर्षो से अवैध बताए जा रहे निर्माणों पर कार्रवाई कब होगी।  

रसूखदारों को नियमों का हवाला देकर बचाने के आरोप लग रहे हैं। इन 53 मामलों में विधायक विष्णु खत्री का कोलुखेड़ी में पक्का मकान , उनके रिश्तेदार राकेश शर्मा का भी कोलुखेड़ी में पक्का मकान है, पूर्व आईपीएस मैथिलीशरण गुप्त का बिशनखेड़ी में शेड वाला पक्का मकान है, कारोबारीयों, बिल्डरों, अफसरों समेत कई रसूखदारों के नाम शामिल हैं। निगम ने एनजीटी को बताया कि 15 मामलों में हाईकोर्ट से स्टे होने के कारण कार्रवाई रुकी हुई है। हालांकि जिन 53 मामलों में स्टे नहीं है, उनमें भी कई बड़े नामों के निर्माण अब तक जस के तस खड़े हैं जबकि आसपास के छोटे अतिक्रमण नियम का हवाला देकर हटाए जा चुके हैं।  

यही वजह है कि जिला प्रशासन की कार्रवाई पर दोहरे मापदंड के आरोप लग रहे हैं। आम लोगों और गरीबों के मकानों पर बुलडोजर तेजी से चलता है, लेकिन जब बात नेताओं, पूर्व अफसरों, बड़े कारोबारियों, बिल्डरों और मैरिज गार्डनों की आती है तो फाइलें, समितियां और नियम सामने आ जाते हैं। यही कारण है कि रसूखदारों को बचाने के आरोप लगातार तेज हो रहे हैं।   
अब निगाहें टास्क फोर्स समिति के फैसले पर टिकी हैं, जिसे 16 मार्च 2022 से पहले के इन 53 निर्माणों पर अंतिम निर्णय लेना है। बड़ा सवाल यही है कि क्या समिति नियमों के मुताबिक सभी अवैध अतिक्रमणों पर समान कार्रवाई करेगी, या फिर प्रभावशाली लोगों को राहत मिलती रहेगी। फिलहाल एनजीटी की सख्ती के बाद प्रशासन  की कार्यशैली कठघरे में है और लोगों को इंतजार है कि कानून का बुलडोजर इस बार रसूखदारों तक भी पहुंचेगा या नहीं। 

NGT का 21 दिन का अल्टीमेटमः रसूखदारों के कब्जे न हटे तो अफसरों पर कार्रवाई

बड़ा तालाब, कलियासोत और केरवा डैम के आसपास वर्षों से चले आ रहे अतिक्रमण पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। न्याय अधिकरण ने स्पष्ट कर दिया है कि, 50 मीटर एफटीएल यानि फुल टैंक लेवल के क्षेत्र में किसी भी तरह का अवैध निर्माण या कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एनजीटी ने साफ कहा है कि वेटलैंड, फुल टैंक लेवल (एफटीएल) और प्रतिबंधित क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी अब संबंधित एसडीएम और तहसीलदार की होगी। अगर कार्रवाई में लापरवाही या देरी हुई तो इन अधिकारियों को खुद एनजीटी के सामने जवाब देना पड़ेगा। 

एनजीटी ने एसडीएम और तहसीलदार को वेटलैंड, एफटीएल और प्रतिबंधित क्षेत्र में हुए सभी अवैध निर्माणों की सूची तैयार कर तीन सप्ताह के भीतर शपथपत्र के साथ रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को होगी। दरअसल 29 जुलाई 2026 को पारित आदेश में एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने भोज वेटलैंड संरक्षण से जुड़े चार मामलों की संयुक्त सुनवाई की। सुनवाई में  बताया कि बड़े तालाब के 50 मीटर एफटीएल क्षेत्र के सात गांवों के सर्वे में बड़े तालाब के 50 मीटर बफर जोन में 117 अतिक्रमण मिले थे। इनमें 68 सरकारी और 49 निजी जमीन पर हैं। अब तक 45 अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं, जबकि 72 पर अभी कार्रवाई बाकी है। इनमें ज्यादातर रसूखदारों के हैं। एनजीटी ने एसडीएम, तहसीलदार और जिला प्रशासन को एफटीएल, वेटलैंड और मास्टर प्लान के उल्लंघन वाले सभी अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर भोपाल को पुलिस विभाग के अधिकारी को समिति में शामिल करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि अतिक्रमण हटाने में पुलिस बल की कमी बाधा न बने। 

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