कुंदन कुमार/​पटना। बिहार में त्रि-स्तरीय पंचायत व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा और साहसी कदम उठाया है। पटना में आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री संतोष सिंह ने इसे राज्य के प्रशासनिक इतिहास का एक ऐतिहासिक दिन करार दिया है। उन्होंने बताया कि राज्य में लंबे समय से लंबित पंचायती राज संस्थाओं के परिसीमन को सरकार ने आधिकारिक मंजूरी दे दी है।

​तीन दशकों से अधिक का इंतजार हुआ खत्म

​पूर्व मंत्री ने जोर देकर कहा कि बिहार में पंचायतों का परिसीमन एक ऐसी मांग थी जो बीते 36 वर्षों से अधूरी थी। लंबे अंतराल के बाद हो रहे इस परिसीमन से प्रशासनिक ढांचे में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। संतोष सिंह ने इस निर्णय के लिए सम्राट चौधरी का विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विकास की मुख्यधारा से वंचित क्षेत्रों को अब नई पहचान और नई गति मिलेगी।

​विकसित बिहार का मार्ग प्रशस्त

​संतोष सिंह ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए विकसित बिहार का निर्माण अनिवार्य है और इसकी नींव पंचायतों के सशक्तिकरण से ही शुरू होती है। परिसीमन का सीधा लाभ जमीनी स्तर पर दिखाई देगा। जब पंचायतें भौगोलिक और जनसांख्यिकीय रूप से पुनर्गठित होंगी तो सरकारी योजनाओं का लाभ कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति तक अधिक पारदर्शिता और तीव्रता के साथ पहुंच सकेगा।

​युवाओं के लिए अवसरों के नए द्वार

​इस परिसीमन को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया न मानते हुए उन्होंने इसे युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर बताया है। उनके अनुसार पंचायतों के पुनर्गठन से नई नेतृत्व क्षमता उभर कर सामने आएगी, जो भविष्य के बिहार को नई दिशा देने में सक्षम होगी। यह कदम एक शसक्त और आत्मनिर्भर पंचायत व्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

​त्वरित क्रियान्वयन पर जोर

​प्रेस वार्ता के अंत में पूर्व मंत्री ने सरकार से इस प्रक्रिया को युद्ध स्तर पर पूरा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का जो सपना पंचायत के संपूर्ण विकास का है उसे साकार करने की कुंजी यही परिसीमन है। यदि सरकार इसे तय समय सीमा के भीतर पूरा कर लेती है तो यह ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक ऐसा क्रांतिकारी बदलाव होगा जिसे आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी।
​यह निर्णय न केवल प्रशासनिक सुधार है बल्कि यह बिहार के ग्रामीण लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करने की दिशा में एक निर्णायक राजनीतिक कदम भी है।