कुंदन कुमार/ पटना। बिहार में नई सरकार के गठन के साथ ही राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर थी कि नीतीश कुमार अपने पुत्र निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री बनाकर उनकी विधिवत लॉन्चिंग करेंगे। हालांकि, जब जदयू कोटे से अनुभवी नेता बिजेंद्र यादव और विजय चौधरी ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तो इन अटकलों पर पूर्ण विराम लग गया। नीतीश कुमार ने एक बार फिर अनुभवी चेहरों पर भरोसा जताकर अपनी ‘परिवारवाद विरोधी’ छवि को बरकरार रखने का प्रयास किया है।
पोस्टर का संदेश: जनता के बीच जाएंगे, चुनकर आएंगे
शपथ ग्रहण के ठीक बाद निशांत कुमार की ओर से जारी एक पोस्टर ने सबका ध्यान खींच लिया है। इस पोस्टर में स्पष्ट संदेश दिया गया है कि वह किसी ‘शॉर्टकट’ के जरिए सत्ता के शीर्ष पर नहीं बैठेंगे। पोस्टर की इबारत कहती है जनता के बीच जाएंगे, जनता से चुनकर आएंगे। इस एक वाक्य ने बिहार की राजनीति में बड़ा संदेश दिया है कि निशांत अब सक्रिय राजनीति के मैदान में उतरने को तैयार हैं, लेकिन एक ‘पैराशूट लैंडिंग’ के बजाय वह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे।
जदयू की सोची-समझी रणनीति
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस पोस्टर के जरिए जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने दो निशाने साधे हैं। पहला, विपक्ष द्वारा लगाए जाने वाले परिवारवाद के आरोपों को कुंद करना और दूसरा, निशांत को एक जमीनी नेता के रूप में स्थापित करना। यह साफ हो गया है कि निशांत की राजनीति में एंट्री तो हो गई है, लेकिन उन्हें सीधे किसी बड़े पद पर नहीं बिठाया जाएगा। उन्हें पहले जनता का विश्वास जीतना होगा, जिससे भविष्य में उनके नेतृत्व को स्वाभाविक स्वीकार्यता मिल सके।
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