कुमार इंदर, जबलपुर। भाजपा विधायक संजय पाठक को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जज को फोन करने के मामले में उच्च न्यायालय ने बिना शर्त माफी स्वीकार कर ली है। हाईकोर्ट ने संजय पाठक को चेतावनी देते हुए कहा कि केस से जुड़ा कोई भी व्यक्ति जज को कॉल या मैसेज नहीं कर सकता। कोर्ट ने माना कि अवमानना हुई है लेकिन न्याय प्रक्रिया में बड़ा हस्तक्षेप नहीं हुआ।
हाईकोर्ट ने यह भी हिदायत दी कि जनप्रतिनिधि भविष्य में ऐसी गलती न दोहराएं। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की बेंच ने आदेश देते हुए कहा कि संजय पाठक ने गलती मानी, बिना शर्त माफी मांगी इसलिए माफी स्वीकार की गई है। कोर्ट ने यह भी कहा कि माफी नियम नहीं अपवाद है, लेकिन इस केस में स्वीकार्य किया जाता है। सुनवाई के दौरान मुकुल रोहतगी ने दलील देते हुए कहा कि कॉल गलती से हुआ था, लेकिन कोई बात नहीं हुई।
यह है पूरा मामला
भाजपा विधायक संजय पाठक के 1200 करोड़ रुपए के अवैध खनन मामले की सुनवाई से ये पूरा विवाद जुड़ा हुआ था। दरअसल, 1 सितंबर 2025 को माइनिंग मामले में हाईकोर्ट में जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच में सुनवाई होना थी। लेकिन उससे पहले संजय पाठक ने जस्टिस विशाल मिश्रा को फोन किया था। जस्टिस विशाल मिश्रा ने 1 सितंबर को खुद कहा था कि संजय पाठक ने उन्हें फोन किया है। इस घटना के बाद उन्होंने संजय पाठक का केस सुनने से इंकार कर दिया था। जिस्टस विशाल मिश्रा ने मामले को चीफ जस्टिस के पास भेजा था।
संजय पाठक के वकील ने भी केस लड़ने से इंकार कर दिया था। हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस की बेंच ने संजय पाठक के खिलाफ क्रिमिनल कंटेंप्ट दर्ज करने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट खुद मामले में कंप्लेनेंट बनकर कार्रवाई कर रही है। हाई कोर्ट ने मामले को बेहद गंभीर मानकर स्वतः संज्ञान लिया था। संजय पाठक के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर कटनी निवासी आशुतोष दीक्षित ने याचिका लगाई थी।
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