कुमार इंदर, जबलपुर। मध्यप्रदेश के 5 लाख संविदा कर्मियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। नियमितीकरण और न्यूनतम वेतनमान का आदेश फिलहाल लागू रहेगा। सरकार की रोक लगाने की मांग कोर्ट ने खारिज कर दी है। सरकार ने कोर्ट के आदेश को हाईकोर्ट की डबल बैंच में चैलेंज किया था।
पूर्व आदेश पर रोक लगाने से इंकार
सरकार का तर्क- सुनवाई के वक्त पूरे दस्तावेज पेश नहीं कर पाए थे। कोर्ट ने सरकार के तर्क से असहमत होते हुए पूर्व आदेश पर रोक लगाने से इंकार किया है। कोर्ट ने राहत देते हुए कहा- सरकार चाहे तो पूर्व की बेंच में दस्तावेज जमा कर सकती है लेकिन तबतक पूर्व का आदेश जारी रहेगा।
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दरअसल पूरा मामला साल 2020 की याचिका से जुड़ा है। कोर्ट ने कहा- 10 साल से अधिक सेवा वालों को ‘अस्थायी’ नहीं मान सकते। कोर्ट के इस फैसले से लाखों परिवारों में खुशी की लहर, स्थायीकरण की उम्मीद भी जगी है।
दो दिन पहले ये था फैसला
HC ने राज्य सरकार को आदेश दिए थे कि सरकार संविदा कर्मियों का वर्गीकरण कर वेतन, सेवा संबंधी लाभ दें। 10 वर्ष से ज्यादा सेवा वाले कर्मियों को 2016 की पॉलिसी का लाभ मिले। 2016 की पॉलिसी में कुशल, अर्धकुशल वर्गीकरण का प्रावधान है। HC ने अपने फैसले में टिप्पणी की- संविदा, आउटसोर्स कर्मियों को लाभ से वंचित करना तर्कहीन है। संविदा कर्मियों को आर्थिक न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता। MP के संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों ने याचिका दायर की थी। याचिका में राज्य सरकार द्वारा कम वेतन देने को समानता के अधिकार का उल्लंघन बताया था।
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