दिल्ली के महरौली इलाके में नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या के मामले में पुलिस एक सप्ताह के भीतर अदालत में 1500 से अधिक पन्नों का आरोप पत्र दाखिल कर सकती है। चार्जशीट (Chargesheet) में आरोपी कैब चालक की गतिविधियों और वारदात से जुड़े घटनाक्रम का विस्तृत ब्योरा शामिल किया। वारदात के बाद आरोपी ने शव को छिपाने की कोशिश की थी। इसी दौरान वह अपना ड्राइविंग लाइसेंस घटनास्थल पर ही भूल गया। पुलिस ने ड्राइविंग लाइसेंस को मामले की जांच में अहम साक्ष्य माना है। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी की गतिविधियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं और उपलब्ध साक्ष्यों को एकत्र किया। इनमें CCTV फुटेज, कैब की आवाजाही और अन्य तकनीकी एवं फोरेंसिक साक्ष्य शामिल हैं। पुलिस ने इन सभी साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम को क्रमवार तैयार किया है।

आरोप पत्र के अनुसार, आरोपी बाशु कुमार सिंह (29) बच्ची के अपहरण से करीब 1 घंटे पहले महरौली पहुंचा था। शुरुआत में उसने उस फुटपाथ के पास से कार निकाली, जहां बच्ची अपने माता-पिता और 3 छोटे भाई-बहनों के साथ सो रही थी। इसके बाद वह इलाके में घूमता रहा और बाद में उसी स्थान के पास वापस लौटा। पुलिस का आरोप है कि वारदात के बाद शव को छिपाने की कोशिश के दौरान जल्दबाजी में आरोपी का ड्राइविंग लाइसेंस घटनास्थल पर ही गिर गया। पुलिस ने इसे मामले की जांच में अहम साक्ष्य माना है। इसके बाद आरोपी शव को एक सुनसान जगह पर ले गया, जहां तीन बड़े पत्थरों के नीचे उसे छिपाने की कोशिश की गई।

89 पन्नों में फोटो और तकनीकी साक्ष्य

आरोप पत्र में करीब 89 पन्नों में फोटो और अन्य दृश्य साक्ष्य शामिल किए गए हैं। इनमें आरोपी की कार, फुटपाथ पर सो रहे बच्ची के परिवार, आरोपी के आने-जाने के रास्ते और उस स्थान की तस्वीरें शामिल हैं, जहां बाद में शव बरामद हुआ। तस्वीरों में दर्ज समय ने जांचकर्ताओं को घटना से पहले और बाद में आरोपी की गतिविधियों का मिलान करने में मदद की। पुलिस ने आरोपी के बयान और CCTV फुटेज के आधार पर उसके बताए घटनाक्रम का सत्यापन किया। साथ ही ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरों से मिली कार की तस्वीरों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया। इन रिकॉर्ड के जरिए आरोपी की कैब की आवाजाही और उसके बताए घटनाक्रम का मिलान किया गया। गुरुग्राम से आने के बाद सिंह ने संगम विहार में एक यात्री को छोड़ा था। इसके बाद करीब ढाई घंटे के दौरान उसने दो अन्य सवारियां रद्द कर दीं। पुलिस का आरोप है कि दूसरी सवारी लेने के बजाय वह उसी इलाके में घूमता रहा, जहां से बाद में बच्ची को उठाया गया।

शोर सुनकर जागा पिता

जांचकर्ताओं के अनुसार, सिंह कथित अपहरण से करीब एक घंटे पहले घटनास्थल पर पहुंचा था और कुछ समय तक वहीं रहा। पुलिस का आरोप है कि तड़के करीब 4:15 बजे वह बच्ची को वहां से लेकर चला गया। बच्ची को कार की ओर ले जाते समय उसके शोर मचाने से पिता की नींद खुल गई। पिता ने कुछ दूरी तक वाहन का पीछा कर बच्ची को बचाने की कोशिश की, लेकिन वह आरोपी की कार तक नहीं पहुंच सके।

मौत की वजह गला घोंटना और मुंह दबाना बताई

आरोप पत्र में बच्ची की मौत का कारण गला घोंटना और मुंह दबाना बताया है। आरोपी ने कथित तौर पर गमछे का इस्तेमाल किया था, जिसे बाद में घटनास्थल से बरामद किया गया। दस्तावेज में यह भी उल्लेख है कि आरोपी ने बच्ची के चेहरे पर पत्थर से वार किया था। पुलिस ने मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट समेत अन्य फोरेंसिक साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया है। आरोपी को घटना के करीब 6 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया गया था। उसकी निशानदेही पर घटना के करीब 11 से 12 घंटे बाद बच्ची का शव बरामद किया गया।

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