नई दिल्ली/पटना‌। बक्सर से लोकसभा सांसद सुधाकर सिंह ने देश भर में छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस और प्रशासन द्वारा की जा रही दमनकारी कार्रवाइयों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर घटनाओं की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराने की जोरदार मांग की है। सांसद ने स्पष्ट किया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखना और असहमति जताना कोई अपराध नहीं है, लेकिन हालिया समय में सरकार और प्रशासन का रुख छात्रों के प्रति बेहद संवेदनहीन रहा है।

​लोकतांत्रिक प्रदर्शन और पुलिसिया बर्बरता

​सांसद सुधाकर सिंह ने अपने पत्र में दिल्ली, बिहार और देश के अन्य राज्यों में पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था, बेहतर शिक्षा और अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे छात्रों का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक तरीकों से विरोध प्रदर्शन कर रहे युवाओं के साथ अपराधियों जैसा सलूक किया जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज, छात्राओं के साथ हुए दुर्व्यवहार और बिहार के जहानाबाद में प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा की गई फायरिंग जैसी अमानवीय घटनाओं का कड़ा विरोध किया है।

​छात्रों के पोस्टर लगाने और इनाम घोषित करने पर आपत्ति

​सुधाकर सिंह ने आंदोलनरत छात्रों के दमन के तरीकों पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि छात्रों के खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज करना, उन्हें गिरफ्तार करना, नजरबंद करना और उनकी तस्वीरें सार्वजनिक करके उन पर इनाम घोषित करना किसी भी तरह से लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुकूल नहीं है। उन्होंने बिहार में प्रदर्शनकारियों की पहचान बताने वाले को 10,000 रुपये का इनाम देने की घोषणा और सार्वजनिक स्थानों पर छात्रों के पोस्टर चस्पा किए जाने की तीव्र आलोचना की है।

​प्रधानमंत्री के समक्ष रखी गईं प्रमुख मांगें

​सांसद ने प्रधानमंत्री मोदी के सामने कई अहम और ठोस मांगें रखी हैं, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • ​न्यायिक जांच: देश भर में छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस और प्रशासन की भूमिका की उच्चस्तरीय स्वतंत्र न्यायिक जांच कराई जाए।
  • ​जहानाबाद फायरिंग की जांच: जहानाबाद जिले में हुई पुलिस फायरिंग की अलग से निष्पक्ष न्यायिक जांच हो।
  • ​मुकदमे वापसी और रिहाई: आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज सभी झूठे मुकदमे तत्काल वापस लिए जाएं और हिरासत में बंद सभी विद्यार्थियों को बिना शर्त रिहा किया जाए।
  • ​दोषी अधिकारियों पर एक्शन: लाठीचार्ज और बल प्रयोग के मामलों की जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
  • ​सुरक्षा और सम्मान: छात्राओं के साथ अभद्र व्यवहार और यौन उत्पीड़न के आरोपों से घिरे पुलिसकर्मियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई हो।
  • ​पोस्टर हटाना: प्रदर्शनकारियों की पहचान पर घोषित इनाम और छात्रों के लगाए गए अपमानजनक पोस्टर तुरंत हटाए जाएं।

​सरकार के नैतिक दायित्व की याद

​पत्र के समापन पर सुधाकर सिंह ने कहा कि लोकतंत्र की बुनियाद असहमति और संवाद पर टिकी होती है, इसे किसी भी कीमत पर अपराध नहीं माना जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार का प्राथमिक कर्तव्य न सिर्फ कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, बल्कि अपने नागरिकों के बुनियादी संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना भी है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि सरकार देश के लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों की रक्षा करने में असमर्थ है, तो उसे अपनी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए।